छत्तीसगढ़ में हिरासत में मौत के एक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य पुलिस और प्रशासन पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने FIR दर्ज करने में 2 साल 7 महीने की देरी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देखे बिना गलत तथ्यों वाला हलफनामा दाखिल करने पर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने छत्तीसगढ़ के DGP अरुणदेव गौतम की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की। DGP ने सुनवाई के दौरान अलग-अलग मुद्दों पर पांच बार माफी मांगी। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि मौत का कारण अल्कोहल विड्रॉल बताया गया, जबकि पोस्टमॉर्टम में सिर पर कुंद वस्तु से चोट का उल्लेख था।
मामला 2024 में हिरासत के दौरान एक युवक की मौत से जुड़ा है। परिवार ने न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। कोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने के साथ पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिरासत में मौत जैसे गंभीर मामलों में जांच और कार्रवाई में देरी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।






