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28 रुपये तक बढ़ने वाला है पेट्रोल-डीजल का रेट? इस रिपोर्ट ने उड़ाई सबकी नींद

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। क्रूड ऑयल पहले 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो युद्धविराम के बाद कुछ समय के लिए नीचे आया, लेकिन अब फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है।

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय रिफाइनरियों को हर महीने लगभग 27,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। अगर यही स्थिति बनी रहती है तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी संभव है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चुनावी माहौल के कारण फिलहाल कीमतें स्थिर रखी गई हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद दामों में बढ़ोतरी हो सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत और घरेलू खुदरा दामों के बीच अंतर काफी बढ़ चुका है, जिसे लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल होगा। हालांकि सरकार इसे एक बार में लागू करने की बजाय धीरे-धीरे यानी “स्टैगर्ड अप्रोच” के तहत बढ़ोतरी कर सकती है, ताकि आम जनता पर अचानक बोझ न पड़े और महंगाई नियंत्रित रहे।

इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित सप्लाई मानी जा रही है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस कारण भारत का आयात बिल भी रोजाना काफी बढ़ गया है।

सरकार ने पहले कुछ कदम उठाए हैं, जैसे एक्साइज ड्यूटी में कटौती और विंडफॉल टैक्स का पुनः लागू होना, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ये उपाय केवल अस्थायी राहत दे सकते हैं, स्थायी समाधान नहीं।

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