निशानेबाजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को पहचान दिलाने वाले जसपाल राणा नहीं रहें। उन्होंने एशियाई खेलों, एशियाई चैंपियनशिपस और कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का नाम रौशन किया और कई मेडल जीते। इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने अगली पीढ़ी को भी अपने अनुभव से नई ओलंपिक में मेडल जीताने में अहम भूमिका निभाई।
भारत के पूर्व शूटर और दिग्गज शूटिंग कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को 49 साल की उम्र में निधन हो गया। जसपाल एशियाई खेलों के पूर्व गोल्ड मेडलिस्ट थे और ओलंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर की सफलता में भी उनका अहम योगदान रहा।
जसपाल राणा का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के एक गढ़वाली परिवार में हुआ था। उनके पिता नारायण सिंह राणा सेना के पूर्व अधिकारी थे, जो कि बाद में उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री भी बने। जसपाल राणा को निशानेबाजी विरासत में मिली थी। 12 साल की छोटी-सी उम्र में ही उन्होंने इंटरनेशनल लेवल पर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। उनके इस सफर में उनके पिता ही उनके पहले कोच बने थे।
जसपाल राणा का करियर
जसपाल राणा ने अपने करियर के दौरान एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियाई चैंपियनशिप में कई मेडल जीते और भारत के दमदार शूटर के तौर पर विश्व में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने अपने शानदार करियर में कॉमनवेल्थ गेम्स के चार संस्करणों- 1994, 1998, 2002 और 2006 में भारत का प्रतिनिधित्व किया और कुल 15 पदक जीते।
जसपाल राणा ने भारत के लिए जीते 15 पदक
इनमें 9 गोल्ड, 4 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल शामिल रहे। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स में भी देश के लिए कई मेडल जीते। 1994, 1998 और 2006 के एशियन गेम्स में उन्होंने कुल 8 मेडल हासिल किए।
| पदक का प्रकार | संख्या |
|---|---|
| 🥇 गोल्ड मेडल | 9 |
| 🥈 सिल्वर मेडल | 4 |
| 🥉 ब्रॉन्ज मेडल | 2 |
| कुल पदक | 15 |
खिलाड़ी के साथ-साथ उनका योगदान बतौर कोच भी यादगार रहा। उन्होंने अपनी अगुवाई में भारत को कई बड़े शूटर दिए, जिन्होंने विश्व स्तर पर देश का परचम लहराया। जसपाल को एनआरएआई द्वारा 25 मीटर पिस्टल इवेंट के लिए हाई परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया गया था। इस खेल में कड़ी ट्रेनिंग रूटीन को शुरू करने का श्रेय जसपाल को दिया जाता है।
जसपाल राणा को मिले सम्मान
निशानेबाज जसपाल राणा को खेल के क्षेत्र में कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
- अर्जुन पुरस्कार (1994)
- पद्मश्री (1997)
- द्रोणाचार्य पुरस्कार (2020 में कोचिंग के लिए)

जसपाल राणा ने मनु भाकर को दी ट्रेनिंग
जसपाल राणा की देखरेख में पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल्ड मेडल जीते थे। मनु यह कारनामा करने वाली पहली भारतीय शूटर बनी थीं। जसपाल को बतौर कोच उनके योगदान के लिए साल 2020 में द्रोणाचार्य अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत देश के दिग्गजों ने शोक जताया। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने आईएएनएस के साथ बातचीत करते हुए जसपाल के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा, “यह बहुत बड़ी क्षति है। वह न केवल एक चैंपियन शूटर थे, बल्कि एक बेहतरीन मेंटर भी थे। वह हमेशा हमारी यादों में रहेंगे।”
भारत के लिए बड़ा झटका
जसपाल राणा का निधन भारतीय शूटिंग के लिए बहुत बड़ा झटका है। अपने करियर के दौरान उन्होंने इस खेल को भारत में पहचान दिलाई और युवा पीढ़ी को शूटिंग में करियर बनाने के लिए प्रेरित किया। निशानेबाज मनु भाकर उन्हीं की ट्रेनिंग का एक नमूना है, जिन्होंने ओलंपिक में भारत के लिए मेडल जीता था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जसपाल म्यूनिख में हुए ISSF वर्ल्ड कप के बाद जर्मनी से लौट रहे थे और इस दौरान उनकी अचानक से तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह मौजूदा समय में भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई परफॉर्मेंस कोच के रूप में काम कर रहे थे। उनकी अगुवाई में भारतीय टीम इस टूर्नामेंट में दो गोल्ड और दो सिल्वर मेडल जीतने में सफल रही थी।






