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EXIT POLLS में हार, HC से मार और EC से तकरार; TMC को एक दिन में 3 झटके

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने में महज तीन दिन बाकी हैं। इससे पहले ही सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को महज 24 घंटे में 3 बड़े झटके लग गए। एक ओर जहां पार्टी को अधिकांश EXIT POLLS में निराशा हाथ लगी। वहीं, गुरुवार रात मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ माने जाने वाले भबानीपुर में ही जमकर ड्रामा हुआ और भारत निर्वाचन आयोग ने टीएमसी के EVM में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया।

29 अप्रैल, बुधवार शाम मतदान के दूसरे चरण के बाद एग्जिय पोल सामने आए, जिनमें 7 में से 6 ने राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने का अनुमान लगाया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि टीएमसी कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने के लिए ‘भाजपा के निर्देश पर’ एग्जिट पोल के पूर्वानुमान प्रसारित किए गए। उन्होंने भरोसा जताया कि सत्तारूढ़ पार्टी राज्य के चुनावों में 294 विधानसभा सीटों में से 226 से अधिक सीटें जीतेगी।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतगणना पर्यवेक्षक के रूप में केंद्रीय कर्मियों को नियुक्त करने के निर्वाचन आयोग के निर्देश को चुनौती दी गई थी। जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि राज्य सरकार के कर्मियों की जगह केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों के कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक और सहायक के रूप में नियुक्त करने के निर्वाचन आयोग के फैसले में कोई गैर-कानूनी बात नहीं है।

याचिकाकर्ता के वकील कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी का 30 अप्रैल का बयान बिना अधिकार क्षेत्र के जारी किया गया और केवल आशंका पर आधारित था।

दूसरा केस: गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जावेद अहमद खान की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें निर्वाचन आयोग द्वारा कस्बा विधानसभा क्षेत्र के लिए मतगणना केंद्र को बदलने के फैसले को चुनौती दी गई थी। अदालत ने कहा कि निर्वाचन आयोग के फैसले में कोई गैर-कानूनी बात नहीं है।

अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने यह फैसला लिया है कि मतगणना केंद्र आमतौर पर जिला मुख्यालय में होने चाहिए और केवल असाधारण परिस्थिति में ही, उचित कारणों के आधार पर उप-संभागीय मुख्यालय पर मतगणना की इजाजत दी जा सकती है।

30 अप्रैल को शाम में माहौल गरमा गया था। दरअसल, मुख्यमंत्री बनर्जी खुद ही भबानीपुर स्थिति स्ट्रांग रूम पहुंच गईं थीं। इससे पहले पार्टी उम्मीदवार कुणाल घोष और शशि पांजा ने गुरुवार को खुदीराम अनुशीलन केंद्र में अनियमित गतिविधियों का आरोप लगाते हुए वहां धरना दिया। जबकि निर्वाचन आयोग ने उनके आरोपों को खारिज किया। तृणमूल के नेताओं ने आरोप लगाया कि सीसीटीवी कैमरों से लाइव-स्ट्रीम किए गए फुटेज में स्ट्रांग रूम के अंदर बाहरी लोगों की मौजूदगी दिखाई दी, जो मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे।

निर्वाचन आयोग ने केंद्र में मतदान सामग्री के प्रबंधन से संबंधित इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि मतदान अधिकारी उचित प्रक्रिया के अनुसार डाक मतपत्रों को अलग करने में लगे हुए थे और स्ट्रांग रूम सुरक्षित हैं। आयोग के एक अधिकारी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘खुदीराम अनुशीलन केंद्र के अंदर विधानसभा क्षेत्रवार सात स्ट्रांगरूम हैं, जिनमें से सभी को मतदान पूरा होने के बाद उम्मीदवारों, उनके चुनाव एजेंट और सामान्य पर्यवेक्षक की उपस्थिति में बंद कर दिया गया है और सील कर दिया गया है।’

उन्होंने कहा कि अंतिम स्ट्रांगरूम को गुरुवार सुबह करीब 5:15 बजे सील कर दिया गया। अधिकारी ने अनियमितता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, ‘सभी स्ट्रांगरूम को सुरक्षित रूप से सील कर दिया गया है।’ आयोग ने कहा, ‘हमने सभी पर्यवेक्षकों और निर्वाचन अधिकारियों (आरओ) को सूचित कर दिया था और आरओ से अनुरोध किया था कि वे उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों को तदनुसार सूचित करें। आरओ ने भी ईमेल के माध्यम से राजनीतिक दलों को सूचित कर दिया था।’

कथित वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधि के बारे में निर्वाचन आयोग के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ‘निर्धारित प्रक्रिया के हिस्से के रूप में शाम चार बजे से स्ट्रांगरूम के बाहर गलियारे में मतपत्रों को अलग करने का काम किया जा रहा था।’ उन्होंने कहा कि सभी स्ट्रांगरूम को सुरक्षित रूप से सील कर दिया गया है और पांजा, घोष तथा भाजपा के एक प्रतिनिधि सहित विभिन्न प्रतिनिधियों को सभी व्यवस्थाएं दिखाई गईं।

आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि सभी प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन किया गया है। उसने जनता से आग्रह किया कि वह सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट सामग्री से गुमराह न हो।

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