रायपुर, “तस्वीर बदली, अब तकदीर बदल रही है”-यह पंक्ति आज पूरे छत्तीसगढ़, विशेष रूप से बस्तर अंचल की बदलती हकीकत को सटीक रूप में अभिव्यक्त करती है। दशकों तक नक्सलवाद के साए में जीने वाला बस्तर अब उस कलंक से बाहर निकलकर विकास की मुख्यधारा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जो क्षेत्र कभी असुरक्षा और अविकास का प्रतीक था, वही आज उम्मीद, प्रगति और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन रहा है।
एक समय था जब बस्तर में सूरज की रोशनी तो भरपूर थी, लेकिन विकास का उजाला नहीं था। प्राकृतिक संपदा से समृद्ध होने के बावजूद यहां के दूरस्थ गांव बुनियादी सुविधाओं-विशेषकर बिजली-से वंचित रहे। विद्युत आपूर्ति के अभाव में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ सीमित रह जाता था। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं।
नक्सल उन्मूलन और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने के साथ बस्तर में विकास के नए द्वार खुल रहे हैं। इस परिवर्तन में ऊर्जा क्षेत्र की भूमिका केंद्रीय बनकर उभरी है। राज्य सरकार ने न केवल पारंपरिक विद्युत ढांचे को मजबूत किया है, बल्कि सौर ऊर्जा जैसे अक्षय स्रोतों पर भी विशेष ध्यान दिया है। सूरज की प्रचुर रोशनी वाले इस क्षेत्र में अब सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दिसंबर 2023 में शपथ ग्रहण के बाद से छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रति व्यक्ति वार्षिक विद्युत खपत 2,117 यूनिट से बढ़कर 2,159 यूनिट तक पहुंचना इस दिशा में सुधार का संकेत है। ग्रामीण विद्युतीकरण 100 प्रतिशत पर कायम है, जबकि दिसंबर 2023 से मार्च 2026 के बीच 119 ऑफ-ग्रिड गांवों को विद्युतीकृत किया गया है। बस्तर में इस विकास को और स्थायी बनाने की दिशा में नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कैंप स्थापित होने के बाद इन ऑफ-ग्रिड गांवों को ग्रिड से जोड़ने की योजना प्रस्तावित है, जिससे बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर और दीर्घकालिक हो सके। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से जनवरी 2026 की स्थिति में 151 ग्रामों में तथा 15 हजार 819 आवासों में विद्युतीकरण पूर्ण हो चुका है।
ऊर्जा विस्तार में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भी एक मजबूत स्तंभ बनकर सामने आई है। इस योजना के तहत राज्य में 50 हजार 811 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। 31 हजार 157 उपभोक्ताओं को राज्य शासन द्वारा 94 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है, जिससे आम नागरिकों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो रही है। जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के तहत 122 करोड़ रुपये व्यय कर 19 हजार 641 घरों का विद्युतीकरण किया गया है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत विशेष रूप से पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के 7 हजार 338 घरों में 41 करोड़ रुपये की लागत से शत-प्रतिशत विद्युतीकरण सुनिश्चित किया गया है। यह पहल न केवल विकास को अंतिम छोर तक पहुंचाने का उदाहरण है, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस दौरान बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 66 लाख से अधिक पहुंच गई है। वहीं, 1.48 लाख से अधिक नए विद्युत पंपों की स्थापना से कृषि क्षेत्र को भी नई ऊर्जा मिली है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से किसानों की उत्पादकता बढ़ रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशवासियों के जनजीवन में गहरे सकारात्मक परिवर्तन का संकेत है। अब गांवों में रोशनी के साथ नई उम्मीदें भी जगमगा रही हैं। छोटे उद्योग विकसित हो रहे हैं, डिजिटल सेवाएं पहुंच रही हैं और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
वास्तव में, बस्तर अब अंधेरे से उजाले की ओर बढ़ चुका है-जहां कभी सन्नाटा था, वहां अब विकास की गूंज सुनाई दे रही है। बदली हुई तस्वीर अब बस्तर की तकदीर को नया आयाम दे रही है और यह परिवर्तन आने वाले समय में पूरे छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनता दिखाई दे रहा है।






