नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण बड़ी गंडक, राप्ती, रोहिन, चंदन और प्यास नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर और महराजगंज के कई निचले और जलभराव वाले क्षेत्रों में अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। जिला प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी-नालों व जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को जीर्ण-शीर्ण मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर ऐसे लोगों को निकटतम राहत शरणालयों में पहुंचाया जाए, ताकि भारी बारिश या आकस्मिक बाढ़ की स्थिति में जनहानि को रोका जा सके।
राप्ती, रोहिन और चंदन नदी का बढ़ा जलस्तर
महराजगंज के धानी क्षेत्र में रिगौली बांध पर राप्ती नदी का जलस्तर बढ़कर 76.85 मीटर पहुंच गया है। सदर क्षेत्र के त्रिमुहानी घाट पर रोहिन नदी 78.48 मीटर और ठूठीबारी क्षेत्र में चंदन नदी का जलस्तर 99.65 मीटर दर्ज किया गया। कंट्रोल रूम के अनुसार महराजगंज और नेपाल सीमा से जुड़े सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं।
गंडक बैराज का डिस्चार्ज 1.29 लाख क्यूसेक पहुंचा
नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश के बाद बड़ी गंडक नदी में पानी तेजी से बढ़ रहा है। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से शुक्रवार सुबह आठ बजे 79,700 क्यूसेक डिस्चार्ज दर्ज किया गया, जो शाम चार बजे बढ़कर 1,21,500 क्यूसेक और शाम पांच बजे 1.29 लाख क्यूसेक पहुंच गया।
नदी का जलस्तर बढ़ने से कुशीनगर के रेता क्षेत्र में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। छितौनी तटबंध के भैसहा गेज पर गंडक नदी चेतावनी बिंदु 95 मीटर के मुकाबले करीब 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इससे तटबंध पर बनाए गए स्परों पर नदी का दबाव बढ़ गया है। ठोकर नंबर दो और भेड़ियारी ठोकर नंबर तीन पर कटान का खतरा भी बना हुआ है।
बाढ़ खंड के एसडीओ संजय गौंड टीम के साथ तटबंध और संवेदनशील बिंदुओं का निरीक्षण कर रहे हैं। करीब दो सप्ताह तक शांत रहने के बाद नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में बारिश के चलते बड़ी गंडक एक बार फिर उफान पर है।
महाव नाला खतरे के निशान से साढ़े चार फीट ऊपर
महराजगंज में महाव नाला भी उफान पर है। इसका जलस्तर बढ़कर 9 फीट 6 इंच पहुंच गया है, जो खतरे के निशान पांच फीट से करीब साढ़े चार फीट ऊपर है। वहीं पहाड़ी नदी प्यास का जलस्तर 101.80 मीटर दर्ज किया गया है। खतरे का निशान 102.25 मीटर है।
दो दिन में 10 एमएम बारिश, किसानों की बढ़ी चिंता
गोरखपुर मंडल में पिछले दो-तीन दिनों से रुक-रुककर बारिश और तेज हवा का दौर जारी है। इससे जहां किसानों को सिंचाई से राहत मिली है, वहीं तेज हवा के कारण कई क्षेत्रों में पककर तैयार धान और खड़ी गन्ने की फसल खेतों में गिर गई है। निचले और चंवर क्षेत्रों में पानी भरने से धान की फसल प्रभावित होने लगी है। नदी पार इलाकों में केले की खेती को भी नुकसान की आशंका है।
कुशीनगर के सोहसा मठिया, सोहसा, कुरमौटा, मंझरिया, नरकटिया, महुई बुजुर्ग, परवरपार, पिपरी और मदरहा समेत कई गांवों में बारिश से धान की फसल को पानी मिला है। हालांकि तेज हवा के कारण कई खेतों में धान और गन्ने की फसल गिर गई है।
नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के चंवर और निचले इलाकों में खेतों में पानी भर गया है। रामकोला क्षेत्र में भी तेज हवा और बारिश से गन्ने की खड़ी फसल प्रभावित हुई है।
फाजिलनगर में केले की फसल को नुकसान
फाजिलनगर के जौरा बाजार और आसपास के गांवों में तेज हवा के कारण अगैती धान और गन्ने की खड़ी फसल गिर गई। नदी पार क्षेत्र में केले के पौधे भी तेज हवा की चपेट में आकर गिर गए हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है।
मौसम में आई ठंडक
लगातार बारिश के कारण मौसम में भी बदलाव आया है। सुबह से शाम तक रुक-रुककर बारिश होने से लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है और तापमान में गिरावट दर्ज की गई। कृषि विज्ञान केंद्र सरगटिया के अध्यक्ष डॉ. नवीन कुमार सिंह के अनुसार अगले तीन दिनों तक रुक-रुककर बारिश और तेज हवा चलने की संभावना है। शुक्रवार को कुशीनगर में अधिकतम तापमान 26 डिग्री और न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।







