नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लोन की ब्याज दरें तय करने वाले बेंचमार्क में बदलाव को लेकर नया फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसके तहत बैंक और वित्तीय संस्थान ग्राहक की मंजूरी के बिना लोन से जुड़े बेंचमार्क में बदलाव नहीं कर सकेंगे।
प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य लोन ग्राहकों को बैंकों के एकतरफा फैसलों से होने वाले वित्तीय नुकसान से बचाना और ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है। बेंचमार्क बदलने के बाद नई ब्याज दर भी बदलाव से ठीक पहले लागू दर से अधिक नहीं रखी जा सकेगी।
RBI के ड्राफ्ट के मुताबिक, बेंचमार्क में बदलाव के लिए ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क भी नहीं लिया जा सकेगा। यदि किसी फ्लोटिंग-रेट लोन का बेंचमार्क बंद हो जाता है या उपलब्ध नहीं रहता, तो बैंक को तय नियमों के अनुसार वैकल्पिक बेंचमार्क पर लोन को शिफ्ट करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक पर प्रतिकूल वित्तीय प्रभाव न पड़े।
प्रस्तावित फ्रेमवर्क में फ्लोटिंग-रेट लोन के लिए बेंचमार्क, ब्याज दर रीसेट की अवधि और रीसेट की तारीख जैसी जानकारी स्पष्ट रूप से लोन एग्रीमेंट में दर्ज करना भी जरूरी होगा। अधिकांश फ्लोटिंग-रेट लोन के लिए बेंचमार्क रीसेट की अवधि तीन महीने से अधिक नहीं रखने का प्रस्ताव है।
RBI ने मौजूदा लोन को भी एक समान फ्रेमवर्क में लाने की दिशा में कदम उठाया है। प्रस्ताव के अनुसार, इंटरनल या एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़े मौजूदा लोन और एडवांस को 1 अप्रैल 2029 तक निर्धारित फ्रेमवर्क के तहत मैप करने का प्रावधान है।
लोन ट्रांसफर के मामलों में भी ब्याज दर, बेंचमार्क, स्प्रेड और रीसेट मैकेनिज्म से जुड़ी मौजूदा शर्तों को लेकर स्पष्ट नियम प्रस्तावित किए गए हैं। नए नियम लागू होने की संभावित तारीख 1 अप्रैल 2027 बताई गई है। अंतिम फैसला ड्राफ्ट पर मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।






