भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इस फैसले के बाद रेपो रेट अब 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो गया है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई MPC की बैठक में यह निर्णय लिया गया। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है, जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। इससे पिछले कुछ समय से जारी नीतिगत दरों में स्थिरता का सिलसिला भी खत्म हो गया है।
क्यों बढ़ाया गया रेपो रेट?
RBI के फैसले के पीछे बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने आर्थिक जोखिम अहम वजह बताए जा रहे हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर पहुंच गया है।
महंगे कच्चे तेल का असर आने वाले समय में ईंधन से लेकर दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा अगस्त में खुदरा महंगाई दर भी बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 4.45 प्रतिशत थी। इन परिस्थितियों ने RBI के सामने महंगाई को नियंत्रित रखने की चुनौती बढ़ा दी है।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
रेपो रेट बढ़ने का असर बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ने पर वे कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
इसका असर खास तौर पर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में नई EMI महंगी हो सकती है। जिन ग्राहकों के लोन की ब्याज दर रेपो रेट से जुड़ी हुई है, उनकी मौजूदा EMI या लोन की अवधि पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है।
दूसरी पॉलिसी दरों में भी बदलाव
RBI ने रेपो रेट के साथ कुछ अन्य नीतिगत दरों में भी बदलाव किया है। SDF रेट बढ़कर 5.25 प्रतिशत हो गया है। वहीं MSF रेट और बैंक रेट 5.75 प्रतिशत पर पहुंच गए हैं।
केंद्रीय बैंक ने वैश्विक स्तर पर महंगाई को लेकर बनी अनिश्चितता को भी रेखांकित किया है। RBI का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक घटनाक्रम आने वाले समय में महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।
महंगाई पर RBI की नजर
RBI के लिए इस समय महंगाई एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अगस्त में खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, कम बारिश और अल नीनो से जुड़े जोखिमों के कारण कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
ऐसे माहौल में RBI ने आर्थिक स्थिरता के साथ महंगाई पर नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए रेपो रेट बढ़ाने का फैसला किया है।







