उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना के जलस्तर में पिछले 24 घंटे के दौरान कुछ कमी आने से तटवर्ती इलाकों के लोगों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन टोंस और मंदाकिनी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने हालात फिर चिंताजनक कर दिए हैं। टोंस नदी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान का असर प्रयागराज के नैनी क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है।
गंगा-यमुना के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी शुरू होने से कछारी इलाकों में रहने वाले परिवारों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए 17 परिवारों के 64 लोग राहत शिविर में पहुंच चुके हैं। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों के लिए भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
टोंस नदी ने बढ़ाई परेशानी
सिंचाई विभाग के अनुसार टोंस नदी का जलस्तर पिछले 24 घंटे में करीब 1.10 मीटर बढ़ा है। नदी का पानी लगातार बढ़ने से आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
टोंस और बेलन नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण कोरांव और मेजा क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने की सूचना है। अधिकारियों की नजर लगातार नदियों के जलस्तर पर बनी हुई है।
विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों की चिंता यह है कि अगर टोंस का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो गंगा और यमुना में फिलहाल शुरू हुई गिरावट लंबे समय तक जारी रहना मुश्किल हो सकता है।
नैनी में यमुना फिर बढ़ने लगी
प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में पहले गिरावट दर्ज की गई थी। 24 घंटे की अवधि में नैनी में यमुना का जलस्तर करीब 19 सेंटीमीटर नीचे आया था। फाफामऊ में गंगा के जलस्तर में 2 सेंटीमीटर और छतनाग में करीब 10 सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गई।
हालांकि, इसके बाद यमुना में दोबारा बढ़ोतरी शुरू हो गई। रात आठ बजे के आसपास नैनी में यमुना करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही थी। फाफामऊ में गंगा भी लगभग आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से बढ़ रही थी।
फिलहाल गंगा और यमुना दोनों नदियां खतरे के निशान से नीचे हैं, लेकिन जलस्तर में दोबारा शुरू हुई बढ़ोतरी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
17 परिवारों ने राहत शिविर में ली शरण
गंगा के बढ़ते पानी से तटीय इलाकों में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें बढ़ रही हैं। कई घरों में पानी पहुंचने के बाद लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है।
राजापुर क्षेत्र के प्रभावित परिवारों के लिए ऋषिकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में राहत शिविर बनाया गया है। बुधवार रात तक यहां 17 परिवारों के 64 लोग मौजूद थे।
शिविर में रह रहे लोगों को सुबह नाश्ता और दोपहर व रात का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके बावजूद प्रभावित परिवारों को अपने घरों में छूटे सामान की चिंता सता रही है।
घर में पानी, छत पर रखा सामान
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की एक महिला ने बताया कि उनके घर में कई दिनों से पानी भरा हुआ है। घर का जरूरी सामान छत पर रखकर बच्चों के साथ राहत शिविर में रहना पड़ रहा है।
प्रभावित लोगों की सबसे बड़ी चिंता घर में रखे सामान की सुरक्षा को लेकर है। उनका कहना है कि बाढ़ के कारण घर खाली होने से चोरी का डर भी बना हुआ है।
बाढ़ प्रभावितों तक पहुंचाया जा रहा भोजन
बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत अभियान भी जारी है। बाघंबरी पीठाधीश्वर महंत बलवीर गिरि की ओर से प्रभावित इलाकों में भोजन प्रसाद वितरित कराया जा रहा है।
बाढ़ के कारण कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। ऐसे में जरूरतमंद परिवारों तक भोजन पहुंचाया जा रहा है। बड़ी संख्या में प्रभावित लोगों ने इस राहत अभियान का लाभ उठाया।
प्रशासन की बढ़ी निगरानी
गंगा-यमुना के जलस्तर में दोबारा बढ़ोतरी और टोंस-मंदाकिनी के उफान को देखते हुए प्रशासन और सिंचाई विभाग की निगरानी बढ़ गई है। फिलहाल सबसे ज्यादा नजर टोंस नदी के जलस्तर पर है।
अगर नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ता है, तो कछारी और तटीय इलाकों में रहने वाले और अधिक परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ सकता है। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर समय रहते राहत शिविरों में पहुंचाना है।






