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ऑनलाइन ठगी केस में 1 करोड़ रिश्वत मांगने का आरोप, ट्रेनी IPS पर कोर्ट सख्त


अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में उस समय हलचल मच गई जब अंबिकापुर में पदस्थ एक ट्रेनी आईपीएस अधिकारी पर एक करोड़ रुपये रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप लगे। इस मामले में दिल्ली की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ऑनलाइन ठगी के एक मामले में कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल ने एक करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी।

सीबीआई स्पेशल कोर्ट ने प्रथम दृष्टया शिकायत पर संज्ञान लेते हुए छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक (DGP) और सीबीआई निदेशक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता हरियाणा निवासी आकाश कुमार है, जिसके खिलाफ अंबिकापुर साइबर रेंज थाने में करीब 20.15 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी का मामला दर्ज है। आकाश कुमार का आरोप है कि मामले की जांच के दौरान तत्कालीन अंबिकापुर सीएसपी एवं ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल ने जांच को प्रभावित करने और राहत दिलाने के एवज में एक करोड़ रुपये की मांग की।

शिकायतकर्ता का दावा है कि कथित रिश्वत की रकम हवाला नेटवर्क के माध्यम से संबंधित अधिकारी तक पहुंचाई गई। परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया है कि एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा ने कथित तौर पर मध्यस्थ की भूमिका निभाई। शिकायतकर्ता ने अपने दावों के समर्थन में व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट, ऑडियो क्लिप और अन्य दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए हैं।

आकाश कुमार का कहना है कि उसने इस मामले की शिकायत पहले सीबीआई निदेशक को भी लिखित रूप से भेजी थी और निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उसने दिल्ली स्थित सीबीआई स्पेशल कोर्ट का रुख किया।

परिवाद में ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल, एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 7ए तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 308 और 351 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू करने की मांग की गई है।

मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश सुधांशु कौशिक ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डीजीपी और सीबीआई निदेशक को नोटिस जारी किया है। अदालत ने डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी थी। डीजीपी की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए एक माह का समय मांगा, लेकिन अदालत ने यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया और निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। उस दिन अदालत संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों पर विचार करेगी।

फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मामले में अभी न्यायिक जांच पूरी नहीं हुई है और अदालत ने किसी भी आरोपी को दोषी नहीं ठहराया है। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। वहीं, संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

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