BREAKING

छत्तीसगढताज़ा खबर

महासमुंद बिजली विभाग में कथित ठेकेदारी का खेल! 10 साल से जमे अधिकारियों की मुख्यमंत्री से शिकायत

मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में रायगढ़ रीजन के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे मनीष तनेजा और महासमुंद के अधिकारी पंचूराम वर्मा पर गंभीर आरोप

महासमुंद। जिले के बिजली विभाग में अधिकारियों की लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थापना, कथित ठेकेदारी और विभागीय कार्यों में लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अखिल भारतीय प्रशासनिक सुधार परामर्शी संगठन के कोरबा क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा इस संबंध में मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच, अधिकारियों के कार्यकाल की समीक्षा और स्थानांतरण नीति के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महासमुंद जिले में सहायक यंत्री एवं कार्यपालन यंत्री स्तर के कुछ अधिकारी पिछले 10 से 12 वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ हैं। नियमानुसार अधिकारियों का निर्धारित अवधि के बाद स्थानांतरण होना चाहिए, लेकिन संबंधित अधिकारियों की लंबे समय से एक ही जिले में पदस्थापना को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मनीष तनेजा पर रायगढ़ रीजन में दोहरी जिम्मेदारी संभालने का आरोप

शिकायत में मनीष तनेजा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि वे लगभग 20 महीनों से रायगढ़ रीजन के मुख्य अभियंता का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं, जबकि इस पद पर नियमित नियुक्ति अथवा पदस्थापना नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस दौरान क्षेत्र में अन्य अधिकारियों की पदस्थापना और पदोन्नति से संबंधित प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि तनेजा द्वारा पूरे रीजन में विभागीय जिम्मेदारियों के साथ-साथ कथित तौर पर ठेकेदारी से जुड़े कार्यों में भी हस्तक्षेप किया जा रहा है। शिकायत में इन आरोपों की जांच कर अतिरिक्त प्रभार, पदस्थापना और विभागीय कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

पंचूराम वर्मा पर किसानों से जुड़ी सेवाओं में लापरवाही के आरोप

महासमुंद जिले में पदस्थ पंचूराम वर्मा को लेकर शिकायत में विशेष रूप से किसानों की समस्याओं का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि वे पिछले लगभग 10 वर्षों से महासमुंद जिले में पदस्थ हैं और विभागीय दायित्वों के निर्वहन के बजाय कथित रूप से ठेकेदारी से जुड़े कार्यों में संलिप्त हैं।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि किसानों को ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने और खराब ट्रांसफार्मर बदलने में अनावश्यक देरी की जाती है। नए बिजली कनेक्शन एवं डिपॉजिट कनेक्शन के मामलों में भी समय पर कार्य नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि कई बार बिना पैसे दिए ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं कराया जाता। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच होना आवश्यक है।

इसके अलावा शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित अधिकारी फोन पर उपलब्ध नहीं रहते और किसानों एवं आम नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ट्रांसफार्मर की उपलब्धता नहीं होने का हवाला देकर कार्यों को लंबित रखने की शिकायत भी की गई है।

स्थानांतरण नीति के पालन पर उठे सवाल

शिकायत में ऊर्जा विभाग की तीन वर्षीय स्थानांतरण संबंधी व्यवस्था का हवाला देते हुए सवाल उठाया गया है कि जब विभाग में निर्धारित अवधि के बाद अधिकारियों के स्थानांतरण की व्यवस्था है, तो कुछ अधिकारी एक ही जिले अथवा क्षेत्र में 10 से 12 वर्षों तक कैसे पदस्थ बने हुए हैं।

शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की पदस्थापना अवधि, विभागीय कार्यों, ठेकेदारी से जुड़े कथित हितों और स्थानांतरण संबंधी नियमों की जांच की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने के पीछे क्या कारण हैं।

किसानों और आम जनता को भुगतना पड़ रहा खामियाजा

बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर किसानों और आम उपभोक्ताओं की परेशानियां भी शिकायत का प्रमुख विषय हैं। क्षेत्र में बार-बार बिजली बंद होने, ब्रेकडाउन, मेंटेनेंस और बिजली व्यवस्था बाधित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों को सिंचाई के लिए समय पर बिजली और ट्रांसफार्मर नहीं मिलने से परेशानी उठानी पड़ रही है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा में लापरवाही का सीधा असर किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों पर पड़ता है। जनप्रतिनिधियों द्वारा भी विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताए जाने का दावा किया गया है।

मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

अखिल भारतीय प्रशासनिक सुधार परामर्शी संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि महासमुंद जिले एवं रायगढ़ रीजन में लंबे समय से पदस्थ अधिकारियों के कार्यकाल की जांच कराई जाए। कथित ठेकेदारी में अधिकारियों की भूमिका की जांच हो, किसानों से ट्रांसफार्मर एवं बिजली कनेक्शन के नाम पर अवैध राशि मांगने की शिकायतों की पड़ताल की जाए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।

संगठन ने यह भी मांग की है कि ऊर्जा विभाग की स्थानांतरण नीति का पालन सुनिश्चित करते हुए लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों का नियमानुसार स्थानांतरण किया जाए, ताकि विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों एवं आम उपभोक्ताओं को समय पर बिजली संबंधी सुविधाएं मिल सकें।

अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय और ऊर्जा विभाग इस शिकायत पर क्या संज्ञान लेते हैं तथा किसानों की समस्याओं और अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की जांच कब तक शुरू होती है।

Related Posts