रानीमाई मंदिर के पास लगाया था पिंजरा; गुड़-नारियल की खुशबू से अंदर आया, इलाज के लिए जंगल सफारी भेजा गया
बालोद। जिले के रानीमाई मंदिर और आसपास के गांवों में पिछले 59 दिनों से घूम रहे घायल भालू को आखिरकार वन विभाग ने पकड़ लिया। भालू के पिछले दाहिने पैर में गंभीर चोट थी। चोट के कारण वह करीब डेढ़ महीने से तीन पैरों पर चल रहा था। शाम होते ही वह भोजन की तलाश में मंदिर और आसपास के गांवों की ओर पहुंच जाता था।
वन विभाग की टीम ने भालू की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी। उसके आने-जाने के रास्ते और पैरों के निशान को ट्रैक करने के बाद मंदिर के पास पिंजरा लगाया गया। इसमें गुड़ और नारियल रखा गया था। रात में भालू इनकी खुशबू से आकर्षित होकर पिंजरे के अंदर पहुंचा और वन अमले ने उसे सुरक्षित पकड़ लिया।
16 जुलाई को सामने आया था VIDEO
घायल भालू की मौजूदगी पहली बार 16 जुलाई को सामने आई थी। उस समय उसका सड़क पार करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में वह पिछले पैर में चोट के कारण लंगड़ाते हुए दिखाई दे रहा था। इसके बाद वन विभाग लगातार उसकी निगरानी कर रहा था।
होटल में घुसकर खाता था भजिया
ग्रामीणों के मुताबिक, भालू अक्सर रात में खाने की तलाश में रानीमाई मंदिर और आसपास पहुंचता था। वह मंदिर के पास स्थित होटलों में घुसकर भजिया खा लेता था। एक बार उसने कड़ाही में रखा तेल भी पी लिया था। मंदिर परिसर में जलाए गए दीयों का तेल पीने की बात भी सामने आई है।
भालू के गांव और मंदिर के आसपास लगातार घूमने से ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में डर बना हुआ था।
इलाज के लिए जंगल सफारी भेजा
रेस्क्यू के बाद वन विभाग ने भालू को सुरक्षित पिंजरे में रायपुर की जंगल सफारी भेज दिया। वहां वन्यजीव विशेषज्ञ उसकी जांच करेंगे और घायल पैर का इलाज किया जाएगा। स्वास्थ्य में सुधार के बाद वन विभाग उसके पुनर्वास और जंगल में छोड़ने को लेकर फैसला करेगा।
जिले में पहले भी दिख चुके हैं भालू
बालोद जिले के डौंडी, दल्लीराजहरा, गुरुर और बालोद वन क्षेत्र में भी भालुओं की मौजूदगी की सूचनाएं मिलती रही हैं। सियादेवी, नारागांव, तांदुला बांध और पर्यावरण पार्क के आसपास भी भालू देखे जाने की घटनाएं सामने आई हैं। कुछ दिन पहले जिला अस्पताल परिसर में भी देर रात भालू दिखाई दिया था।







