क्रिकेट की दुनिया में जब भी भारत और इंग्लैंड की टीमें आईसीसी टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में टकराती हैं, तो रोमांच अपनी चरम सीमा पर होता है। आगामी 5 मार्च को मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में दोनों टीमें पांचवीं बार सेमीफाइनल में आमने-सामने होंगी। अब तक के इतिहास पर नजर डालें तो दोनों टीमों के बीच का पलड़ा 2-2 की बराबरी पर है। लेकिन भारतीय प्रशंसकों के लिए सबसे उत्साहजनक बात यह है कि जब भी भारत ने सेमीफाइनल में इंग्लैंड को धूल चटाई है, टीम इंडिया विश्व विजेता बनकर ही लौटी है।
भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल की पहली भिड़ंत 1983 के वनडे वर्ल्ड कप में हुई थी। मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर इंग्लैंड की टीम जीत की प्रबल दावेदार मानी जा रही थी। इंग्लिश मीडिया ने भारत को हल्के में लिया था, लेकिन कपिल देव की सेना ने इतिहास रचने की ठान ली थी।
धीमी पिच का फायदा उठाते हुए भारतीय गेंदबाजों ने इंग्लैंड को 213 रनों पर समेट दिया। मोहिंदर अमरनाथ की कफ़ायती गेंदबाजी (12 ओवर में 27 रन, 2 विकेट) और यशपाल शर्मा की 61 रनों की जुझारू पारी ने भारत को 6 विकेट से जीत दिला दी। संदीप पाटिल ने अंत में बॉब विलिस के एक ओवर में 4 चौके जड़कर जीत पर मुहर लगा दी। इसी जीत के बाद भारत ने फाइनल में वेस्टइंडीज को हराकर अपना पहला वर्ल्ड कप जीता।
चार साल बाद, 1987 में हिसाब चुकता करने की बारी इंग्लैंड की थी। मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए इस मैच में ग्राहम गूच ने भारतीय स्पिनर्स के खिलाफ ‘स्वीप शॉट’ को अपना हथियार बनाया। गूच ने 115 रनों की शानदार पारी खेली, जिसकी मदद से इंग्लैंड ने 254 रनों का स्कोर खड़ा किया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 64 रन बनाकर उम्मीदें जगाईं, लेकिन उनके आउट होते ही भारतीय पारी ताश के पत्तों की तरह ढह गई। भारत ने अपने आखिरी 5 विकेट मात्र 15 रन जोड़कर गंवा दिए और 35 रनों से मैच हार गया। यह दिग्गज सुनील गावस्कर के अंतरराष्ट्रीय करियर का अंतिम मैच भी साबित हुआ।
आधुनिक क्रिकेट के दौर में 2022 का टी-20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल भारतीय प्रशंसकों के लिए किसी बुरे सपने जैसा था। एडिलेड ओवल में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए हार्दिक पंड्या (63) और विराट कोहली (50) के दम पर 168 रन बनाए। कोहली इसी मैच में टी-20 अंतरराष्ट्रीय में 4000 रन पूरे करने वाले पहले खिलाड़ी बने थे।
लेकिन इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाजों, जोस बटलर और एलेक्स हेल्स ने भारतीय गेंदबाजी की बखिया उधेड़ दी। दोनों ने मिलकर 170 रनों की नाबाद साझेदारी की और इंग्लैंड को 10 विकेट से ऐतिहासिक जीत दिलाई। इस हार ने भारतीय टीम के चयन और रणनीति पर कई सवाल खड़े कर दिए थे।
दो साल बाद, 2024 में गयाना के मैदान पर भारत को बदला लेने का मौका मिला। बारिश से बाधित इस मैच में कप्तान रोहित शर्मा ने मोर्चे से अगुवाई की। उन्होंने 39 गेंदों में 57 रनों की कप्तानी पारी खेली और सूर्यकुमार यादव (47) के साथ मिलकर टीम को 171 के सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया।
गेंदबाजी में अक्षर पटेल और कुलदीप यादव की फिरकी का जादू चला। अक्षर ने जोस बटलर को पहली ही गेंद पर आउट कर इंग्लैंड की कमर तोड़ दी। इंग्लैंड की पूरी टीम महज 103 रनों पर ढेर हो गई और भारत ने 68 रनों की विशाल जीत के साथ फाइनल में प्रवेश किया। इसके बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर टी-20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया।
टी-20 वर्ल्ड कप के इतिहास में यह लगातार तीसरा मौका है जब ये दोनों टीमें सेमीफाइनल में भिड़ रही हैं। 2022 में इंग्लैंड जीता और चैंपियन बना, 2024 में भारत जीता और चैंपियन बना। अब 2026 के इस महामुकाबले में जो भी जीतेगा, उसके पास इतिहास दोहराने का मौका होगा।
मुंबई की लाल मिट्टी वाली पिच पर शाम 7 बजे से शुरू होने वाला यह मुकाबला न सिर्फ कौशल की परीक्षा होगा, बल्कि मानसिक मजबूती का भी टेस्ट होगा। क्या रोहित ब्रिगेड एक बार फिर अंग्रेजों को मात देकर फाइनल का टिकट कटाएगी? या इंग्लैंड 1987 की तरह वानखेड़े में भारत का सपना तोड़ेगा? नजरें अब 5 मार्च पर टिकी हैं।





