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अविमुक्तेश्वरानंद केस में बड़ा मोड़: ‘यौन शोषण का आरोप लगाने के लिए मिला था पैसों का ऑफर’, रमाशंकर का खुलासा

प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज यौन शोषण के मुकदमे ने अब एक सनसनीखेज मोड़ ले लिया है। शाहजहांपुर के रमाशंकर दीक्षित ने वाराणसी पहुंचकर खुलासा किया है कि उन्हें और उनकी बेटियों को मोहरा बनाकर शंकराचार्य को फंसाने की बड़ी साजिश रची गई थी, जिसके पीछे प्रलोभन और धमकियों का खेल था।

शाहजहांपुर के रहने वाले रमाशंकर दीक्षित अपनी पत्नी और तीन बेटियों के साथ वाराणसी स्थित विद्या मठ आश्रम पहुंचे और शंकराचार्य से मिलकर अपनी आपबीती सुनाई। रमाशंकर का दावा है कि 18 फरवरी को तीन अज्ञात लोग उनके घर आए और उनके पिता का नाम लेकर हालचाल पूछा। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल के जरिए उनकी बात आशुतोष महाराज से कराई गई।

आरोप है कि आशुतोष ने उनसे कहा कि वे अपनी बेटियों के जरिए अविमुक्तेश्वरानंद पर वाराणसी आश्रम में यौन शोषण का झूठा आरोप लगाएं। रमाशंकर के अनुसार, उनसे कहा गया कि उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं है, बस एक शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करने के बदले उन्हें बड़ी आर्थिक मदद दी जाएगी। जब उन्होंने इससे इनकार किया, तो उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दी गई।

इस नए खुलासे के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इसे अपने खिलाफ एक बहुत बड़ा राजनीतिक और धार्मिक षड्यंत्र करार दिया है। उनका कहना है कि चूंकि वे गौ-हत्या के खिलाफ मजबूती से आवाज उठा रहे हैं, इसलिए उन्हें बदनाम करने के लिए लोगों को प्रलोभन देकर उनके खिलाफ खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई सीडी या सबूत है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान में सनातन धर्म को सबसे अधिक नुकसान भाजपा और खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में हुआ है।

शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने वाले आशुतोष पांडेय का इतिहास काफी विवादास्पद रहा है। स्रोतों के अनुसार, आशुतोष पांडेय शामली के कांधला थाने का हिस्ट्रीशीटर (HS संख्या 76 A) है। उसके खिलाफ गुंडा एक्ट, गोवध अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट और आईटी एक्ट सहित कुल 21 मुकदमे दर्ज हैं। साल 2019 में तत्कालीन एसपी अजय कुमार के कार्यकाल में उसकी हिस्ट्रीशीट खोली गई थी।
आशुतोष ने पहले स्वामी रामभद्राचार्य से दीक्षा ली और अपना नाम आशुतोष महाराज रख लिया। रमाशंकर का आरोप है कि इसी आशुतोष ने उन्हें फोन पर धमकाते हुए कहा था, “मैं वही आशुतोष पांडेय हूं, मेरे पास और भी रास्ते हैं, अपना ध्यान रखना।”

गौरतलब है कि वेदपाठी छात्रों के साथ कथित यौन शोषण के मामले में कोर्ट के आदेश पर प्रयागराज के झूंसी थाने में पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, रमाशंकर दीक्षित के इस नए दावे ने एफआईआर की सत्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रमाशंकर का कहना है कि मीडिया में खबरें देखकर वे डर गए थे कि कहीं उनके नाम का दुरुपयोग न हो रहा हो, इसलिए वे खुद सच बताने वाराणसी आए। रमाशंकर को अब अपने और अपने परिवार की सुरक्षा की भी चिंता सता रही है। फिलहाल पुलिस इन नए दावों और पुराने आरोपों के बीच कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है।

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