- बैंक प्रबंधन के नाम से की गई लिखित शिकायत
धरसींवा। रायपुर जिले के धरसींवा क्षेत्र स्थित आईडीबीआई बैंक की चरौदा शाखा में सामने आए धोखाधड़ी के मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। पहले एक दंपत्ति के साथ हुई 40 लाख रुपये की ठगी के रूप में सामने आया यह मामला अब बढ़ते-बढ़ते 15 से अधिक प्रार्थियों तक पहुंच गया है। प्रारंभिक जांच में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि के गबन की आशंका जताई जा रही है, वहीं पुलिस को अंदेशा है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं।
मामले की शुरुआत तब हुई जब धरसींवा निवासी नरेंद्र कुमार वर्मा और उनकी पत्नी मनीषा वर्मा ने अपनी जीवन भर की बचत 20-20 लाख रुपये को सुरक्षित निवेश के लिए फिक्स डिपॉजिट कराने का निर्णय लिया। दोनों आईडीबीआई बैंक की चरौदा शाखा पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात बैंक में कार्यरत अस्थायी कर्मचारी राजा खुटे से हुई, जिससे उनका पहले से परिचय था। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए आरोपी ने एफडी कराने की प्रक्रिया बताकर आधार कार्ड, पैन कार्ड की प्रतियां और हस्ताक्षरित दो ब्लैंक चेक ले लिए तथा बाद में कथित एफडी की एक फर्जी पावती भी दे दी।
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब 2 मार्च 2026 को नरेंद्र वर्मा को पैसों की जरूरत पड़ी और उन्होंने एफडी तोड़ने के लिए आरोपी से संपर्क किया। आरोपी के गोलमोल जवाब से संदेह होने पर वे बैंक पहुंचे और खाते का स्टेटमेंट निकलवाया। स्टेटमेंट में सामने आया कि खाते से 40 लाख रुपये की पूरी राशि अलग-अलग तारीखों में निकाली जा चुकी है। जांच में यह भी सामने आया कि ब्लैंक चेक का इस्तेमाल कर रकम किसी दूसरे व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर कर निकाली गई।
इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।और मामला मीडिया में आने के बाद एक के बाद एक नए पीड़ित सामने आने लगे। अब तक लगभग 15 से अधिक लोगों ने अपने साथ इसी प्रकार की धोखाधड़ी होने की शिकायत की है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार कुल राशि एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है और जांच में यह आंकड़ा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
गुरुवार 12 मार्च को सभी प्रार्थियों ने संयुक्त रूप से धरसीवां थाने में आईडीबीआई बैंक की चरौदा शाखा के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस दौरान थाने में प्रार्थियों की बैंक के वर्तमान शाखा प्रबंधक से थाना प्रभारी की मौजूदगी में आमने-सामने चर्चा भी हुई। प्रार्थियों द्वारा पूछे गए सवालों पर शाखा प्रबंधक स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए और तात्कालिक प्रबंधक के कार्यकाल में घटना होने का हवाला देते हुए जांच की बात कही और शिकायत के लिए रायपुर स्थित हेड ऑफिस जाने की बात कही।
पूरे मामले के सामने आने के बाद बैंक के आंतरिक निगरानी तंत्र और तात्कालिक कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण के निर्देशन में चल रही जांच में तात्कालिक बैंक मैनेजर, कैशियर और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस बैंक रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन और बैंक से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है ।
सूत्रों के अनुसार इतनी बड़ी राशि का लेन-देन बिना बैंक के आंतरिक स्तर पर जानकारी के संभव नहीं माना जा सकता, इसलिए मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस बैंक धोखाधड़ी में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।





