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छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में बड़ा खेल,सचिव ने की पुलिस में शिकायत,सच्चाई आई सामने

प्रदीप नामदेव,रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है,जिसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि स्वास्थ्य विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी को खुद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की नौबत आ गई,यह सिर्फ एक ठगी का मामला नहीं,बल्कि पूरे तंत्र की कमजोरी और अंदरूनी गड़बड़ियों की ओर इशारा करता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के नाम पर फर्जी कॉल कर निजी अस्पतालों से पैसे की उगाही की शिकायत सामने आई है, आरोपी खुद को विभाग से जुड़ा बताने वाले अज्ञात व्यक्ति स्वयं को अजय अग्रवाल बताता है,अग्रवाल अस्पताल संचालकों को कॉल कर उन्हें जांच, कार्रवाई या अन्य प्रशासनिक दबाव का डर दिखाकर पैसे की मांग कर रहे थे इस मामले में कई निजी अस्पतालों ने लिखित शिकायत भी दी है,जिसके बाद स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने पुलिस से जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है,

इस पूरे घटनाक्रम ने बड़ा सवाल किया खड़ा

यह केवल बाहरी ठगों का काम है या फिर विभाग के भीतर से ही कोई नेटवर्क सक्रिय है? क्योंकि जिस तरह से ठग विभागीय जानकारी और प्रक्रियाओं का हवाला देकर उगाही कर रहे हैं, उससे यह आशंका और गहरी हो जाती है कि कहीं न कहीं अंदरूनी मिलीभगत भी हो सकती है।प्रदेश के निजी अस्पताल और डॉक्टर पहले से ही प्रशासनिक दबाव और अनियमितताओं से परेशान बताए जा रहे हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं उनके भय को और बढ़ा रही हैं। कई अस्पताल संचालकों का कहना है कि वे सरकारी तंत्र से पहले ही त्रस्त हैं और अब इस तरह की ठगी से उनका भरोसा पूरी तरह डगमगा रहा है।सबसे गंभीर बात यह है कि यह मामला किसी सामान्य नागरिक या छोटे स्तर के अधिकारी का नहीं, बल्कि खुद सचिव स्तर से उठाया गया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ के शीर्ष अधिकारी द्वारा पुलिस में शिकायत दर्ज कराना इस बात का संकेत है कि स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है।राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विभाग का मुखिया ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, तो आम जनता और निजी संस्थानों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।यह भी कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहली बार है जब सचिव स्तर से इस प्रकार की शिकायत सामने आई है। यह न केवल सिस्टम की विफलता को उजागर करता है,बल्कि यह भी दर्शाता है कि भ्रष्टाचार और ठगी का जाल किस हद तक फैल चुका है।अब सवाल यह है कि क्या इस मामले में केवल औपचारिक जांच होगी या फिर वास्तव में उन लोगों तक पहुंचा जाएगा जो इस पूरे नेटवर्क के पीछे हैं। क्योंकि अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।फिलहाल, इस पूरे मामले ने एक बात साफ कर दी है—छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग गंभीर संकट से गुजर रहा है,जहां सिस्टम खुद ही ठगी का शिकार बनता नजर आ रहा है।

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