रायपुर ब्यूरो रिपोर्टर. अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग (IHRPC), छत्तीसगढ़ प्रदेश ने आयुष्मान भारत/पीएम-जय (PM-JAY) के अंतर्गत संचालित स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक अनियमितताओं, नकद वसूली और फर्जी बिलिंग जैसी गंभीर शिकायतों पर चिंता जताई है।

आयोग द्वारा स्वास्थ्य मंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग को भेजे गए ज्ञापन में निम्नलिखित बिंदु उजागर किए गए हैं:
1. निजी अस्पतालों में अनियमितताएँ और धोखाधड़ी
• कई अस्पताल मरीजों से आयुष्मान कार्ड पर इलाज के बावजूद नकद वसूली कर रहे हैं।
• मरीजों को दवाइयों और कंज्यूमेबल्स के नाम पर दोहरी बिलिंग (Double Charging) की जा रही है।
• उपलब्ध अध्ययनों और रिपोर्ट्स से स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ में निजी अस्पतालों द्वारा आयुष्मान योजना की निर्धारित दरों से कई गुना अधिक राशि वसूली जा रही है, जिससे मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
2. योजना का मूल उद्देश्य विफल
• योजना का उद्देश्य “कैशलेस इलाज” है, लेकिन निजी अस्पताल नियमों को दरकिनार कर मरीजों से पॉकेट खर्च वसूल रहे हैं।
• कई मामलों में गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालकर उनके मानवाधिकारों का हनन हो रहा है।
3. आयोग की प्रमुख माँगें
• उच्चस्तरीय जाँच समिति गठित कर दोषी अस्पतालों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए •
PM-JAY व PFHI के अंतर्गत कार्यरत सभी निजी अस्पतालों की Anti-Fraud Audit कराई जाए।
• नकद वसूली की घटनाओं को रोकने हेतु रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए।
• मरीजों को न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु IHRPC की टीम को इस जाँच प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
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प्रदुमन शर्मा (प्रदेश महासचिव, IHRPC) का वक्तव्य:
“यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि गरीब और असहाय मरीज, जिनके लिए आयुष्मान भारत जैसी योजनाएँ चलाई गईं, वही अस्पतालों की मनमानी और लालच का शिकार बन रहे हैं। यह केवल वित्तीय गड़बड़ी नहीं बल्कि मानवाधिकार का सीधा उल्लंघन है। यदि सरकार तुरंत कड़ी कार्रवाई नहीं करती, तो हम इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने और कानूनी हस्तक्षेप की मांग करने के लिए बाध्य होंगे।”
अज़ीम खान (जनसंपर्क अधिकारी, IHRPC) का वक्तव्य:
“जनता के स्वास्थ्य और अधिकारों की रक्षा करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। आयुष्मान योजना गरीबों के लिए जीवनरेखा है, लेकिन निजी अस्पताल इसे मुनाफाखोरी का साधन बना रहे हैं। हम सरकार से मांग करते हैं कि दोषियों को चिन्हित कर कठोर दंड दिया जाए और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए Anti-Fraud Monitoring System लागू किया जाए।”
यदि इस मामले में तत्काल और ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो आयोग इस विषय को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के साथ-साथ न्यायालयीन हस्तक्षेप की मांग भी करेगा।