भारत में 16वीं और आजादी के बाद 8वीं जनगणना की आधिकारिक शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से हो गई है। इसे ‘जनगणना 2027’ (Census 2027) का नाम दिया गया है। मूल रूप से 2021 में प्रस्तावित यह जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण टल गई थी और अब यह दुनिया की सबसे बड़ी ‘डिजिटल जनगणना’ के रूप में सामने आई है। इसमें 1.4 अरब से अधिक लोगों की गिनती की जाएगी। इस बार की जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है क्योंकि यह पहली बार पूरी तरह से डिजिटल हो रही है, जिसमें नागरिक ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ यानी स्वयं-गणना पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी खुद दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा, सरकारी कर्मचारी पारंपरिक कागज के बजाय मोबाइल ऐप के जरिए डेटा इकट्ठा करेंगे। यह महाअभियान दो चरणों में पूरा होगा- पहला चरण ‘मकानों की सूची और आवास जनगणना’ का है, जो अप्रैल 2026 से शुरू होकर सितंबर 2026 तक अलग-अलग राज्यों के तय कार्यक्रम के अनुसार चलेगा।
वहीं, दूसरा चरण ‘जनसंख्या की गणना’ का होगा, जो फरवरी 2027 में किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में यह सितंबर 2026 में होगा। जनगणना 2027 की राष्ट्रीय संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 तय की गई है। एक और महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि दूसरे चरण के दौरान विस्तृत जातिगत आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। 30 लाख से अधिक अधिकारियों और लगभग 11,000 करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाला यह डेटाबेस भारत की भविष्य की नीतियां और योजनाएं तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा। आइए जनगणना 2027 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) के जवाब जानते हैं।
1. जनगणना 2027 की प्रक्रिया कितने चरणों में पूरी होगी?
जनगणना मुख्य रूप से दो चरणों में आयोजित की जा रही है:
पहला चरण (मकान सूचीकरण और आवास जनगणना): यह चरण अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है। इसे राज्यों की सुविधा के अनुसार 30 दिनों के ब्लॉक में पूरा किया जाएगा। इसमें मकानों की स्थिति, पेयजल, रसोई गैस, इंटरनेट और संपत्तियों से जुड़ी जानकारी ली जाएगी।
दूसरा चरण (जनसंख्या की गणना): यह चरण फरवरी 2027 में आयोजित होगा। इसमें जनसांख्यिकीय विवरण, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, शिक्षा, प्रवास, प्रजनन दर और जातिगत जानकारी दर्ज की जाएगी।
2. क्या मैं अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन भर सकता/सकती हूं?
हां, इस बार की जनगणना में सबसे बड़ी और नई सुविधा सेल्फ-एन्यूमरेशन की है। हर राज्य में डोर-टू-डोर (घर-घर) गणना शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले नागरिकों के लिए एक सरकारी ऑनलाइन पोर्टल खोला जाएगा। आप इस पोर्टल पर जाकर, अपनी और अपने परिवार की जानकारी 16 अलग-अलग भाषाओं (हिंदी और अंग्रेजी सहित) में खुद दर्ज कर सकते हैं। यदि आप ऑनलाइन जानकारी नहीं भरते हैं, तो सरकारी कर्मचारी आपके घर आकर मोबाइल ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे।
3. पहले चरण में घर-घर आकर क्या सवाल पूछे जाएंगे?
पहले चरण में कुल 33 से 34 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं-
- मकान का प्रकार (कच्चा/पक्का) और उसकी मौजूदा स्थिति।
- पेयजल, बिजली और शौचालय की उपलब्धता।
- रसोई गैस और खाना पकाने के ईंधन का प्रकार।
- इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्टफोन या कंप्यूटर का उपयोग।
- वाहनों का स्वामित्व (साइकिल, स्कूटर, कार आदि)।
- परिवार में उपभोग होने वाले अनाज का मुख्य प्रकार आदि।
4. क्या जनगणना के दौरान मुझे कोई सरकारी दस्तावेज दिखाना होगा?
बिल्कुल नहीं। जनगणना के दौरान आपको आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, राशन कार्ड या मकान के कागजात जैसे कोई भी दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं है। जनगणना पूरी तरह से आपके द्वारा दी गई मौखिक जानकारी पर आधारित है।
5. मेरे द्वारा दी गई जानकारी कितनी सुरक्षित है? क्या इसका इस्तेमाल कोर्ट या किसी योजना से नाम काटने में हो सकता है?
जनगणना में आपकी ओर से दी गई जानकारी 100% सुरक्षित और गोपनीय है। जनगणना अधिनियम (Census Act, 1948) के तहत, आपके द्वारा दी गई व्यक्तिगत जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है। इस डेटा को आरटीआई (RTI) के जरिए भी नहीं मांगा जा सकता। इसका इस्तेमाल किसी भी अदालत में साक्ष्य (सबूत) के रूप में या किसी सरकारी योजना के लाभ से आपको वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता।
6. भारत की इस पहली ‘डिजिटल जनगणना’ के क्या फायदे होंगे?
तेज परिणाम: पहले कागजी फॉर्म के डेटा को प्रोसेस करने में कई साल लग जाते थे। डिजिटल और ऐप-आधारित होने से डेटा रियल-टाइम में सर्वर पर जाएगा, जिससे जनगणना के कई महत्वपूर्ण आंकड़े 2027 के अंत तक ही प्रकाशित कर दिए जाएंगे।
सटीकता: मोबाइल ऐप और पोर्टल पर सीधे डेटा फीड होने से कागजी गलतियों और डेटा खोने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
पर्यावरण के अनुकूल: कागज का इस्तेमाल न के बराबर होने से यह प्रक्रिया इको-फ्रेंडली है और संसाधनों की बड़ी बचत होगी।
7. क्या जनगणना में भाग लेना अनिवार्य है?
हां। जनगणना अधिनियम, 1948 (Census Act, 1948) के तहत हर नागरिक के लिए सही जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। जानबूझकर सवालों के जवाब देने से मना करने या गलत जानकारी देने पर कानून में आर्थिक जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि, सरकार का जोर दंडात्मक कार्रवाई के बजाय नागरिकों को जागरूक कर सही डेटा जुटाने पर है।
9. जाति गणना कैसे होगी?
पहली बार दूसरे चरण में जाति का विवरण लिया जाएगा। व्यक्ति अपनी जाति खुद बताएगा। समूहगत आंकड़े ही सार्वजनिक होंगे। यह आरक्षण या व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं होगा।
10. डेटा कब और कहां उपलब्ध होगा?
डिजिटल होने से प्रारंभिक आंकड़े 2027 में ही जारी हो सकते हैं। विस्तृत रिपोर्ट बाद में https://censusindia.gov.in/census.website/ पर उपलब्ध होगी। पुरानी जनगणनाओं के डेटा भी वहीं हैं।
11. अगर प्रगणक के आने के समय मैं या मेरा परिवार घर पर न हो, तो क्या होगा?
अगर गणना के वक्त घर पर कोई मौजूद नहीं है, तो प्रगणक दोबारा आपके घर आएंगे। वे आपके पड़ोसियों के माध्यम से आपके उपलब्ध होने का समय पूछ सकते हैं और उस समय दोबारा विजिट कर सकते हैं। आप चाहें तो खुद पोर्टल पर जाकर ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ के जरिए भी अपनी जानकारी भर सकते हैं, जिससे घर पर मौजूद न होने की स्थिति में भी आपका डेटा दर्ज हो जाएगा।
12. क्या एनआरआई (NRIs) और भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों की भी गिनती होगी?
विदेशी नागरिक: जो भी विदेशी नागरिक गणना के समय भारत में भौगोलिक रूप से मौजूद हैं और पिछले 21 दिनों से यहां रह रहे हैं (या आगे रहने का इरादा रखते हैं), उनकी गिनती की जाएगी।
एनआरआई (NRIs): अगर कोई भारतीय नागरिक (NRI) गणना के समय देश से बाहर है और उसके जल्द लौटने की संभावना नहीं है, तो उसे इस जनगणना में शामिल नहीं किया जाएगा।
13. क्या जनगणना 2027 का एनपीआर (NPR) या एनआरसी (NRC) से कोई संबंध है?
यह एक ऐसा सवाल है जिसे लेकर अक्सर भ्रम रहता है। जनगणना पूरी तरह से देश की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक स्थिति जानने का एक अभ्यास है। कुछ राज्यों में सरकार जनगणना के पहले चरण (मकान सूचीकरण) के साथ ही राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने का काम भी कर सकती है, लेकिन इसके लिए कोई बायोमेट्रिक डेटा या नागरिकता साबित करने वाला दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि इस जनगणना का नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) से कोई लेना-देना नहीं है।
14. जनगणना के दौरान बेघर लोगों की गिनती कैसे की जाएगी?
जनगणना में देश के हर उस व्यक्ति की गिनती सुनिश्चित की जाती है जो भारत की सीमा के भीतर है। जो लोग बेघर हैं, फुटपाथ, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या पुलों के नीचे रहते हैं, उनकी गणना के लिए दूसरे चरण (जनसंख्या की गणना) की एक विशेष रात तय की जाती है। उस रात प्रगणक ऐसे सभी स्थानों पर जाकर बेघर लोगों की गिनती करते हैं ताकि कोई भी व्यक्ति जनगणना में छूट न जाए।
आंकड़े राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम
जनगणना 2027 के आंकड़े राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम हैं। इसी डेटा के आधार पर भविष्य में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों का परिसीमन किया जाएगा। इसके अलावा, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण भी इसी जनगणना के अंतिम आंकड़ों के प्रकाशित होने के बाद लागू होगा। भारत की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए मोबाइल ऐप और सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल को 16 अलग-अलग भारतीय भाषाओं में तैयार किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दिए जाने वाले फंड और करों का बंटवारा काफी हद तक जनसंख्या के आंकड़ों पर निर्भर करता है। नई नीतियां बनाने के लिए यह डेटा ‘बेसलाइन’ का काम करेगा। इस महाअभियान में लगभग 30 लाख सरकारी कर्मचारियों को लगाया गया है। इनमें मुख्य रूप से सरकारी स्कूलों के शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर और स्थानीय निकाय के कर्मचारी शामिल हैं।





