पश्चिम एशिया में इन दिनों महायुद्ध छिड़ गया है। ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद हालात छठे दिन भी बेकाबू हैं, जहां दोनों पक्ष पीछे हटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। इस बीच अब ईरान के लिए एक और चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान का एक और दुश्मन हमला करने के लिए घात लगाए बैठा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि उत्तरी इराक में मौजूद ईरानी कुर्द समूह ईरान में सीमा पार कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कुर्द लड़ाके इस युद्ध में उतरते हैं तो इससे अमेरिका-ईरान संघर्ष की दिशा बदल सकती है। यह खबर ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिकी इजरायली हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। एसोसिएटेड प्रेस ने कुर्द अधिकारियों के हवाले से बताया कि इराकी कुर्द मौजूदा संघर्ष में अमेरिका का साथ देने के लिए भी तैयार हैं।
क्या बोला अमेरिका
उत्तरी इराक में मौजूद कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी (पीएके) के अधिकारी खलील नादिरी ने बुधवार को बताया कि उनके कुछ लड़ाके ईरान सीमा के पास के इलाकों में पहुंच चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नेताओं से अमेरिकी अधिकारियों ने संपर्क किया था और संभावित हमले को लेकर चर्चा की गई थी। हालांकि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका के सैन्य मकसद किसी खास समूह को हथियार देने या उसके समर्थन पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अन्य समूह क्या कर रहे हैं, इसकी जानकारी जरूर है, लेकिन अमेरिकी रणनीति उस पर निर्भर नहीं है।
कौन हैं कुर्द?
बता दें कि कुर्द ईरान और इराक के कुछ हिस्सों में रहने वाली एक जातीय समूह है। ये मुख्य रूप से तुर्किये के दक्षिण-पूर्वी हिस्से, उत्तरी इराक, उत्तर-पश्चिमी ईरान और उत्तरी सीरिया के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। ईरानी शासन के खिलाफ गुटों में कुर्द समूहों को सबसे संगठित माना जाता है और माना जाता है कि उनके पास हजारों ट्रेंड लड़ाके हैं। कुर्द लड़ाकों के पास इस्लामिक स्टेट के खिलाफ युद्ध का लंबा अनुभव है।
क्यों होगा बड़ा बदलाव?
इंडियाना यूनिवर्सिटी में कुर्द अध्ययन के विशेषज्ञ हेवा खालिद ने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा कि संघर्ष का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि कुर्द समूह क्या मांग रखते हैं। उनके मुताबिक कुर्द समूह मौजूदा हालात को ईरान में एक अवसर के रूप में देख रहे हैं, जहां वे एकजुट होकर आत्मनिर्णय की मांग उठा सकते हैं। खालिद ने चेतावनी दी कि भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान में अगला नेतृत्व कौन संभालता है और वह कुर्द मांगों पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। उनके अनुसार एक संभावना यह भी हो सकती है कि ईरान के भीतर कुर्दिस्तान जैसा स्वायत्त क्षेत्र उभरे, जबकि दूसरी स्थिति यूगोस्लाविया जैसे विघटन की भी हो सकती है।





