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कानपुर की ऑर्डिनेंस फैक्ट्रियों के कर्मचारियों का बड़ा फैसला, 99.51% ने चुनी केंद्र सरकार की नौकरी

कानपुर। देश की 41 आयुध निर्माणियों के कर्मचारियों ने निगमीकरण के बजाय केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने को प्राथमिकता दी है। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) के मुताबिक, कुल 59,318 रक्षा सिविल कर्मचारियों में से 59,033 ने सेवानिवृत्ति तक सरकारी कर्मचारी बने रहने का विकल्प चुना है। यानी करीब 99.51 प्रतिशत कर्मचारी सरकारी सेवा में ही बने रहना चाहते हैं।

वहीं, केवल 123 कर्मचारियों ने रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प दिया। इसके अलावा 92 कर्मचारियों ने अपना विकल्प नहीं भरा। इस फैसले को आयुध निर्माणियों के कर्मचारियों के बीच निगमीकरण की व्यवस्था को लेकर असहमति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

कानपुर की फैक्ट्रियों में भी सरकारी सेवा पहली पसंद

कानपुर की पांच प्रमुख आयुध निर्माणियों में करीब आठ हजार अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कानपुर (OFC), स्मॉल आर्म्स फैक्ट्री (SAF), फील्ड गन फैक्ट्री (FGK), ऑर्डिनेंस इक्विपमेंट फैक्ट्री (OEF) और ऑर्डिनेंस पैराशूट फैक्ट्री (OPF) शामिल हैं।

फेडरेशन के अनुसार, फील्ड गन फैक्ट्री में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने का विकल्प चुना है। कर्मचारी संगठनों ने इस रुझान को अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग और एकजुटता से जोड़कर देखा है।

क्यों हुआ था आयुध निर्माणियों का निगमीकरण?

केंद्र सरकार ने पूर्ववर्ती आयुध निर्माणी बोर्ड का निगमीकरण करके सात रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का गठन किया था। इस बदलाव के तहत आयुध निर्माणियों को अलग-अलग कंपनियों के रूप में संचालित करने की व्यवस्था की गई।

इस फैसले का रक्षा कर्मचारियों के एक वर्ग ने विरोध किया था। ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन ने सरकार के कदम को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती भी दी थी।

फेडरेशन के मुताबिक, अदालत में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद 15 जून 2026 को अधिसूचना जारी हुई। इसके तहत कर्मचारियों को केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने या संबंधित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में स्थायी रूप से शामिल होने का विकल्प दिया गया। विकल्प चुनने की अंतिम तारीख 15 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई थी।

सरकार से निगमीकरण के फैसले पर पुनर्विचार की मांग

कर्मचारियों के विकल्पों के आंकड़े सामने आने के बाद AIDEF ने केंद्र सरकार से निगमीकरण के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है। फेडरेशन का कहना है कि कर्मचारियों की प्राथमिकता को ध्यान में रखते हुए आयुध निर्माणी बोर्ड को पर्याप्त अधिकारों और बजटीय सहायता के साथ सरकारी विभाग के रूप में फिर से स्थापित किया जाना चाहिए।

इसके अलावा संगठन ने अनुकंपा नियुक्तियों पर लगे प्रतिबंध को हटाने और रक्षा सिविल कर्मचारियों की लंबित मांगों का जल्द समाधान करने की अपील की है।

कर्मचारियों ने निगमीकरण के बजाय सरकारी सेवा पर जताया भरोसा

AIDEF के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सौरभ सिंह चौहान के अनुसार, कर्मचारियों ने निगमीकरण की व्यवस्था के बजाय केंद्र सरकार की सेवा में बने रहने का विकल्प चुनकर अपनी राय स्पष्ट कर दी है। संगठन इसे कर्मचारियों की एकजुटता और लंबे संघर्ष का परिणाम मानता है।

अब निगाहें केंद्र सरकार के अगले कदम पर रहेंगी। कर्मचारियों की भारी संख्या में सरकारी सेवा चुनने के बाद यह देखना अहम होगा कि सरकार उनकी मांगों और आयुध निर्माणियों की मौजूदा व्यवस्था को लेकर क्या फैसला करती है।

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