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भारतीय टेनिस को मिला नया सितारा, माया राजेश्वरन ने जीता पहला प्रोफेशनल खिताब

नई दिल्ली: भारतीय टेनिस की उभरती खिलाड़ी माया राजेश्वरन रेवती ने महज 17 साल की उम्र में शानदार उपलब्धि हासिल की है। माया ने पुर्तगाल के लागोस में आयोजित ITF W35 टेनिस टूर्नामेंट का महिला एकल खिताब जीतकर दिग्गज खिलाड़ी सानिया मिर्जा का 22 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया। उनकी इस जीत को भारतीय टेनिस के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

17 साल और 3 महीने की माया ने फाइनल मुकाबले में स्पेन की सीलिया सरविनो को सीधे सेटों में 6-4, 6-2 से हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने अपने करियर का पहला प्रोफेशनल खिताब भी हासिल किया।

सानिया मिर्जा का रिकॉर्ड टूटा

माया राजेश्वरन ने सबसे कम उम्र में यह खिताब जीतने वाली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। इससे पहले सानिया मिर्जा ने साल 2004 में 17 साल और 10 महीने की उम्र में लागोस में यह उपलब्धि हासिल की थी।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने 17 साल की उम्र में लागोस में ही यह खिताब जीता। हालांकि, सानिया ने नाइजीरिया के लागोस में 10 अक्टूबर 2004 को ट्रॉफी उठाई थी, जबकि माया ने पुर्तगाल के लागोस में 11 अक्टूबर 2026 को इतिहास रचा।

पहले ही मुकाबले में किया बड़ा उलटफेर

माया के लिए टूर्नामेंट का सफर आसान नहीं रहा। विश्व रैंकिंग में 1038वें स्थान पर मौजूद इस युवा खिलाड़ी ने पहले ही दौर में टूर्नामेंट की शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी और विश्व नंबर 246 जुस्तिना मिकुलस्काइट को 7-6(1), 6-1 से हराकर सबको चौंका दिया।

पहले सेट में माया एक समय 0-5 से पीछे चल रही थीं, लेकिन उन्होंने जबरदस्त वापसी करते हुए सेट टाईब्रेकर में जीत लिया। इसके बाद दूसरे सेट में भी उन्होंने शानदार खेल दिखाया और मुकाबला अपने नाम कर लिया।

फाइनल तक ऐसे पहुंचीं माया

पहले दौर में उलटफेर करने के बाद माया ने दूसरे दौर में अर्जेंटीना की बर्टा बोनार्डी को 6-2, 6-0 से हराया। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने आठवीं वरीयता प्राप्त तियान जियालिन को 6-2, 6-1 से मात दी।

सेमीफाइनल में ब्रिटेन की ब्रिट डु प्री के खिलाफ वॉकओवर मिलने से माया को फाइनल में जगह मिली। खिताबी मुकाबले में उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन को जारी रखते हुए स्पेन की सीलिया सरविनो को सीधे सेटों में हराया।

दबाव कम करने के लिए गुनगुनाया गाना

खिताब जीतने के बाद माया ने बताया कि पहला सेट जीतने के बाद उन पर अपना पहला प्रोफेशनल खिताब हासिल करने का दबाव बढ़ गया था। इस तनाव को कम करने के लिए उन्होंने सुबह सुना हुआ एक गाना मन ही मन गुनगुनाना शुरू कर दिया।

इससे उन्हें अपना ध्यान केंद्रित करने और दबाव से बाहर निकलने में मदद मिली। माया ने कहा कि पहला खिताब हमेशा खास होता है और इस जीत से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।

भारतीय टेनिस को मिली नई उम्मीद

माया राजेश्वरन की यह जीत भारतीय टेनिस के भविष्य के लिहाज से अहम मानी जा रही है। महज 17 साल की उम्र में उन्होंने जिस तरह अनुभवी और उच्च वरीयता वाली खिलाड़ियों को चुनौती दी, उससे उनकी क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

अपने पहले प्रोफेशनल खिताब के साथ माया ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस में मजबूत शुरुआत की है। अब उनकी नजरें बेहतर रैंकिंग हासिल करने और आने वाले टूर्नामेंटों में इसी प्रदर्शन को दोहराने पर होंगी।

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