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2027 में महंगाई का झटका? पाम ऑयल की सप्लाई घटने की आशंका, भारत पर भी असर संभव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमतों में आने वाले समय में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। दुनिया के प्रमुख पाम ऑयल उत्पादक देशों में शामिल इंडोनेशिया अपनी निर्यात व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही देश में बायोडीजल की खपत बढ़ाने की योजना से निर्यात के लिए उपलब्ध पाम ऑयल की मात्रा कम होने की आशंका है। इसका असर भारत सहित उन देशों पर पड़ सकता है, जो अपनी जरूरतों के लिए इंडोनेशिया से पाम ऑयल आयात करते हैं।

जनवरी से बदल सकती है निर्यात व्यवस्था

इंडोनेशिया जनवरी 2027 से पाम ऑयल जैसे प्रमुख उत्पादों के निर्यात को सरकारी कंपनी के माध्यम से संचालित करने की योजना बना रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दिसंबर तक निर्यातक विदेशी खरीदारों के साथ सीधे कारोबार कर सकेंगे, लेकिन उन्हें संबंधित सरकारी कंपनी को इसकी जानकारी देनी होगी।

जनवरी से सरकारी कंपनी निर्यात अनुबंधों, अनुमतियों, शुल्क और विदेशी मुद्रा से मिलने वाली रकम की निगरानी करेगी। इसके अलावा, इंडोनेशिया प्रमुख वस्तुओं और खनिजों के लिए एक नया व्यापार मंच शुरू करने की तैयारी में है। इसके जरिए घरेलू बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पाम ऑयल सहित प्रमुख उत्पादों के लिए संदर्भ कीमत निर्धारित करने की योजना है।

बायोडीजल में 50 फीसदी मिश्रण का लक्ष्य

इंडोनेशिया अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बायोडीजल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है। देश की योजना बायोडीजल में मिश्रण का लक्ष्य बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की है, जिसे 2027 तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

इंडोनेशियन पाम ऑयल एसोसिएशन के मुताबिक, देश की मौजूदा बायोडीजल उत्पादन क्षमता इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त मानी जा रही है। हालांकि, बायोडीजल में पाम ऑयल का घरेलू इस्तेमाल बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात के लिए कम तेल उपलब्ध हो सकता है।

वैश्विक बाजार में घट सकती है सप्लाई

इंडोनेशिया की निर्यात नीति में बदलाव और बायोडीजल की बढ़ती मांग का संयुक्त असर 2027 में अधिक स्पष्ट हो सकता है। पाम ऑयल की उपलब्धता घटने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों पर बढ़ने का दबाव पड़ सकता है। हालांकि, कीमतों में वास्तविक बदलाव उत्पादन, वैश्विक मांग, दूसरे उत्पादक देशों की आपूर्ति और सरकारी नीतियों जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

निर्यात व्यवस्था में बदलाव का असर इंडोनेशिया के पाम ऑयल कारोबार, निर्यात से होने वाली कमाई और सरकारी राजस्व पर भी पड़ सकता है। ऐसे में नई व्यवस्था को पारदर्शी तरीके से लागू करना और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।

भारत पर क्या हो सकता है असर?

भारत पाम ऑयल का बड़ा आयातक है और इंडोनेशिया उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। पाम ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने पर भारत के आयात बिल पर दबाव पड़ सकता है। इसका असर खाद्य तेल बाजार पर भी दिखाई दे सकता है।

पाम ऑयल का इस्तेमाल घरों में खाना पकाने के अलावा पैकेज्ड खाद्य पदार्थों, बिस्कुट, स्नैक्स और अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण में भी होता है। यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है और उसका असर घरेलू बाजार तक पहुंचता है, तो खाद्य तेलों तथा पाम ऑयल से बनने वाले कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

हालांकि, भारत में कीमतों पर कितना असर पड़ेगा, यह आयात नीति, रुपये की विनिमय दर, घरेलू मांग और अन्य देशों से होने वाली आपूर्ति पर भी निर्भर करेगा।

कुल मिलाकर, इंडोनेशिया की प्रस्तावित निर्यात व्यवस्था और बायोडीजल की बढ़ती खपत 2027 में वैश्विक पाम ऑयल बाजार को प्रभावित कर सकती है। भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आपूर्ति में होने वाले बदलावों पर नजर रखना अहम होगा।

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