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PM मोदी ने गिनाईं पर्यावरण संरक्षण की उपलब्धियां, हाइड्रोजन ट्रेन से सौर ऊर्जा तक भारत की पहल पर दिया जोर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को “पर्यावरण और जलवायु की गतिशीलता का भविष्य” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की विभिन्न पहलों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को रेखांकित किया।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की संस्कृति में प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण को सदियों से विशेष महत्व दिया गया है। इसी सोच के आधार पर भारत आधुनिक जलवायु चुनौतियों के समाधान के साथ वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की दिशा में काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि देश में सौर ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। करोड़ों घरों तक LED बल्ब पहुंचाने और सौर ऊर्जा के विस्तार से कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है। भारत कोयले के स्वच्छ उपयोग के लिए कोयला गैसीफिकेशन जैसी तकनीकों पर भी काम कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन मोबिलिटी को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए हाइड्रोजन ट्रेन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में भारत तेजी से नई तकनीकों को अपना रहा है।

पीएम मोदी ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और डबल-स्टैक कंटेनर ट्रेनों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे बड़ी मात्रा में माल कम समय में पहुंचाया जा सकता है और परिवहन क्षेत्र के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए हैं। वहीं, ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत बड़ी संख्या में वर्षा जल संचयन संरचनाएं तैयार की गई हैं।

उन्होंने प्राकृतिक खेती और एग्रो-फॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने की दिशा में उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। पीएम के अनुसार, प्राकृतिक खेती के राष्ट्रीय मिशन के तहत देशभर में करीब 24 हजार क्लस्टर बनाए गए हैं, जबकि जलवायु अनुकूल फसलों की हजारों किस्में विकसित की गई हैं।

यह दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 19 और 20 सितंबर 2026 को आयोजित किया जा रहा है। इसमें पर्यावरण विशेषज्ञों के साथ सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी, विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी और पर्यावरण से जुड़े संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। सम्मेलन में 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों की भी भागीदारी है।

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