नई दिल्ली. UPI से पेमेंट आज आम लोगों से लेकर छोटे दुकानदारों और बड़े कारोबारियों तक की रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है. ऐसे में ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर संभावित चार्ज की चर्चा ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है. प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर दिल्ली के कारोबारियों का कहना है कि इससे डिजिटल पेमेंट की रफ्तार प्रभावित हो सकती है.
मौजूदा चर्चा के मुताबिक, ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर करीब 0.4% शुल्क लगाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है. वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने वाले P2P ट्रांजैक्शन को शुल्क से बाहर रखने की बात सामने आई है. हालांकि, यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है और शुल्क की दर, वसूली के तरीके तथा इसका बोझ ग्राहक या व्यापारी में से किस पर पड़ेगा, इस पर फैसला होना बाकी है.
नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट अतुल भार्गव, जनरल सेक्रेटरी विक्रम और जॉइंट सेक्रेटरी अमित गुप्ता ने न्यूज18 से बातचीत में इस संभावित व्यवस्था पर चिंता जताई. व्यापारियों का कहना है कि अगर UPI पेमेंट पर अतिरिक्त लागत आती है तो उसे हर कारोबारी अपने मार्जिन से वहन नहीं कर पाएगा.
व्यापारियों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में अतिरिक्त लागत का असर सामान की कीमतों पर पड़ सकता है. पालिका बाजार और चांदनी चौक जैसे बाजारों में यह चुनौती ज्यादा हो सकती है, जहां कई दुकानों पर कीमतें मोलभाव और बाजार की प्रतिस्पर्धा के आधार पर तय होती हैं.
वहीं, कुछ ग्राहकों ने UPI की मौजूदा लिमिट को बढ़ाने की मांग की है. उनका कहना है कि बड़े भुगतान के लिए UPI की सीमा ज्यादा होनी चाहिए.
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुमान के मुताबिक, 0.4% शुल्क लागू होने पर बैंकों और पेमेंट कंपनियों को सालाना करीब ₹5,000 करोड़ से ₹10,000 करोड़ तक अतिरिक्त आय हो सकती है. हालांकि, फिलहाल इस प्रस्ताव पर बातचीत जारी है और अंतिम फैसला होना बाकी है.







