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Donald Trump ने फोड़ा टैरिफ बम…फार्मा इंडस्ट्री पर लगा दिया 100 प्रतिशत टैरिफ, भारत की बढ़ी टेंशन

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार, 3 अप्रैल को विदेशी दवाओं और मेटल्स (धातुओं) पर नए टैरिफ लागू करने का आदेश दिया है। यह कदम उनके व्यापार एजेंडे को आगे बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह ऐलान ‘लिबरेशन डे’ के ठीक एक साल बाद किया गया, जब ट्रंप ने लगभग सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के साथ ट्रेड वॉर शुरू किया था।

ट्रंप के आदेश के अनुसार विदेश में बनी पेटेंट वाली दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यह टैरिफ तब तक लागू रहेगा जब तक देश अमेरिका के साथ नए व्यापार समझौते करके कम दरें नहीं पाते, या कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्री स्थापित करने का वादा नहीं करतीं।

  • बड़ी कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन वापस लाने (रीशोरिंग) के लिए 120 दिन का समय दिया गया है।
  • छोटी कंपनियों को 180 दिन का समय मिलेगा।
  • जो कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्री स्थापित करने का वादा करेंगी, उन पर टैरिफ 100% की बजाय 20% होगा।
  • यूरोपीयन यूनियन, जापान, साउथ कोरिया और स्विट्जरलैंड इस योजना से अलग रखे गए हैं, क्योंकि उनके साथ पहले से व्यापार समझौते हैं; इन पर पहले से 15 प्रतिशत फार्मा टैरिफ लागू है।
  • जो कंपनियां ट्रंप सरकार के साथ “मोस्ट फेवर्ड नेशन” का समझौता करेंगी और अमेरिका में फैक्ट्री बनाएंगी, उन्हें कड़े टैरिफ से छूट मिल सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा लागू किए गए नए टैरिफ का भारत पर गंभीर असर पड़ने की संभावना है। भारत, जिसे दुनिया का फार्मा हब कहा जाता है, में अमेरिका समेत कई विदेशी दवा निर्माता कंपनियां उत्पादन करती हैं। नए टैरिफ के चलते भारत में बनी दवाओं की कीमतें पहले की तुलना में बढ़ जाएंगी, जिससे देश की फार्मा इंडस्ट्री पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

अब स्टील, एल्यूमिनियम और कॉपर की बड़ी मात्रा वाले तैयार उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगेगा। पहले टैरिफ सिर्फ धातु की मात्रा के हिसाब से लगता था। इस बदलाव से उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद महंगे होने की संभावना बढ़ सकती है।

फरवरी में अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने वैश्विक टैरिफ को रद्द कर दिया था, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप  ने अलग-अलग कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल करके फिर से शुल्क लागू करने की कोशिश की है।

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