रायपुर । रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित ‘Press Se Miliye’ कार्यक्रम में डिप्टी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने 31 मार्च की डेडलाइन के आखिरी दिन बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पांच दशकों पुरानी नक्सल समस्या दो साल में अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है। यह राज्य के लिए यह स्मरणीय और वंदनीय है, जिसे सुरक्षा बलों, सरकार और बस्तर की जनता के संयुक्त प्रयासों से संभव बनाया गया।
विजय शर्मा ने आगे कहा कि, दिसम्बर 2023 में सरकार बदल गई थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जनवरी 2024 की बैठक में एक चर्चा होती है कि, देश में 75 फीसदी नक्सलवाद हमारे छत्तीसगढ़ में था। उस बैठक में यह निर्देश दिए गए कि, CRPF, BSF और पुलिस इस बात की गणना बतायेगे कि, कैसे नक्सलवाद का समूल नाश और उन्मूलन किया जाएगा, यह अपनी रिपोर्ट में दें।
दूसरी बैठक में बनाया गया रोड मैप
उन्होने आगे कहा कि, दूसरी बैठक 24 अगस्त 2024 में इन रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह घोषणा कि, जो नक्सली लोगों की हत्याएं करते हैं, उन्हें 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को समाप्त करने की घोषणा की थी। उस समय सभी के मन में यह आया था कि, यह कैसे होगा। मेरे मन में भी यह बात आई थी और मैंने उनसे पूछा भी था कि, यह कैसे होगा। तब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में रोडमैप बताया था। जिसमें उन्होंने सभी संस्थाओं की रिपोर्ट का जिक्र किया था। जिसमें उन्होने बताया था कि, कैसे इन योजनाओं पर काम करके हम नियत समय पर लक्ष्य को हासिल कर पाएंगे।
बस्तर की जनता ने लाल आतंक को खत्म करने का बनाया था मन
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने आगे कहा कि, बस्तर की जनता ने लाल आतंक को स्वीकार करने का मन छोड़ दिया था। जिसमें उन्होंने यह ठान लिया था कि, नक्सलवाद खत्म होना चाहिए और बस्तर में स्कूल, रोड, अस्पताल, उन्नत किस्म के बीज और पानी समेत कई सुविधाएं पहुंचनी चाहिए। इसी बीच जनवरी से अगस्त के बीच में काफी और गतिविधियां हुई थी। जिसमें एक बार स्वयं मैंने बार कोड जारी कर कहा था कि, पुनर्वास कैसा होना चाहिए या अन्य फीडबैक दे सकते हैं। मैंने कहा था कि, यदि कोई बात करना चाहता है तो सरकार छोटे हो या बड़े समूह से निशर्त बात करने को तैयार है।
टेक्नोलॉजी बेस्ड इंटेलिजेंस की रही महत्वपूर्ण भूमिका
उन्होने आगे कहा कि, लाल आतंक को खत्म करने का सबसे बड़ा श्रेय बस्तर की जनता को जाता है। दूसरा सबसे बड़ा श्रेय सशस्त्र बलों के जवानों को जाता है, जिनकी भुजाओं की ताकत से इसे संभव किया गया। विधानसभा चुनाव के पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि, यदि सरकार बनती है तो हम नक्सलवाद को खत्म करने का काम करेंगे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसकी घोषणा की और सरकार बनने पर इस पर कवायत भी शुरू हुई। इस अभियान में टेक्नोलॉजी बेस्ड इंटेलिजेंस को कई क्षेत्रों में पुख्ता किया गया। जिसमें जंगल स्पष्ट दिखता था, इसलिए जब ऑपरेशन हुए तो एकदम परफेक्ट सफलता मिली जिसमें अनेक नक्सली न्यूट्रलाइज हुए और जवानों को कोई खरोच तक नहीं आई।
विपक्ष ने लगाए थे फर्जी मुठभेड़ के आरोप
डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने आगे कहा कि, जब ऑपरेशन हो रहे थे तो विपक्ष से सहयोग की अपेक्षा थी। लेकिन उन्होंने फर्जी मुठभेड़ के आरोप लगाने शुरू कर दिए थे। जिसमें पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने भी फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाया था। जिसके बाद नक्सलियों ने पत्र जारी कर बताया था कि, हां… इतने ही लोगों का एनकाउंटर हुआ है। यह ना जानते बुझते हुए भी सेना पर तोहमत लगा देना जैसी बात थी। जवानों के पराक्रम के कारण ही आज का दिन संभव हुआ है।
समाज प्रमुखों और पत्रकारों की पुनर्वास करवाने में रही अहम भूमिका
उन्होने आगे कहा कि, मैं लगातार हर महीने नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर के समाज के प्रमुखों के साथ बैठता था। जिसमें दोरला, भतरा, मुड़िया, माड़िया और गोड़ के समाज प्रमुखों से मुलाकात करता था। उन्होंने जो काम बताए उसे करके मैंने अपील की थी कि, इन लोगों से बातचीत करके इन्हें वापस लाया जाए. जिसमें समाज के सभी लोग इस बात से सहमत थे। कुछ समाज के लोगों ने वापस लेकर पुनर्वास करवाया। ऐसे ही नारायणपुर, सुकमा और बीजापुर पंचायती राज के प्रतिनिधियों ने भी चर्चाएं कर पुनर्वास करवाया। जो नक्सली वापस आना चाहते थे, उन्हें पत्रकार साथियों ने भी अपना नंबर जारी कर पुनर्वास करवाया। नक्सलवाद को खत्म करवाने में पत्रकारों का भी काफी योगदान रहा।





