ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने अब एक नया और बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया है। ईरान की शक्तिशाली सेना रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद करने का ऐलान किया है। खामेनेई की मौत के बाद उपजे तनाव के बीच आई इस धमकी ने वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा दिया है। सेना ने साफ चेतावनी दी है कि इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को तुरंत आग के हवाले कर दिया जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की ऊर्जा लाइफलाइन माना जाता है क्योंकि यहां से वैश्विक तेल का पांचवा हिस्सा गुजरता है। यह संकरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और अरब देशों के तेल का मुख्य रास्ता है। अगर यह रास्ता बंद होता है तो सऊदी अरब, कुवैत और इराक जैसे देशों की तेल आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस जलमार्ग में कोई भी सैन्य हलचल एक बड़े वैश्विक महायुद्ध का कारण बन सकती है। ईरान और ओमान इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखते हैं और यहां से व्यापारिक जहाजों का गुजरना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अधीन है। इससे पहले भी फरवरी में हुए सैन्य अभ्यास के कारण तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया था।
ब्रिगेडियर जनरल सरदार इब्राहिम जबारी ने स्पष्ट किया है कि अब इस रास्ते पर उनके गार्ड्स का कड़ा पहरा रहेगा। उन्होंने सरकारी मीडिया से बात करते हुए कहा कि कोई भी देश इसे पार करने की कोशिश करेगा तो उसे अंजाम भुगतना होगा। 1980 के ‘टैंकर युद्ध’ के बाद यह पहली बार है जब ईरान ने इस तरह की पूर्ण बंदी का आधिकारिक ऐलान किया है।
इस फैसले से चीन समेत कई एशियाई देशों को होने वाली तेल और गैस की सप्लाई पर सबसे बुरा असर पड़ने वाला है। हालांकि सऊदी अरब के पास कुछ वैकल्पिक पाइपलाइनें मौजूद हैं लेकिन वे पूरे तेल निर्यात को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह स्थिति आत्मघाती साबित हो सकती है क्योंकि ईंधन की भारी किल्लत होने की भारी आशंका है।
ईरान के भीतर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC अब सरकार से भी अधिक शक्तिशाली और स्वतंत्र होकर फैसले ले रही है। अमेरिका और इजराइल के साथ जारी सैन्य संघर्ष के बीच यह संगठन अपने दम पर कई रणनीतिक सैन्य फैसले ले रहा है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस जलमार्ग पर टिकी हैं क्योंकि यहां से निकलने वाला धुआं विश्व युद्ध की आहट दे रहा है।





