लोरमी । अचानकमार टाइगर रिज़र्व में 25 जनवरी को एक बाघ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग ने प्रारंभिक तौर पर इसे दो बाघों के बीच हुए आपसी संघर्ष का नतीजा बताया है, लेकिन स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बाघ का शव कम से कम 5 से 6 दिन पुराना प्रतीत हो रहा था। यदि यह आशंका सही है, तो रिज़र्व में की जा रही नियमित गश्त, कैमरा ट्रैप निगरानी और फील्ड मॉनिटरिंग की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
गश्त और कैमरा ट्रैप पर संदेह
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक शव की स्थिति से स्पष्ट है कि बाघ की मौत हालिया नहीं थी। इतने संवेदनशील टाइगर रिज़र्व क्षेत्र में यदि एक बाघ कई दिनों तक मृत अवस्था में पड़ा रहे और विभाग को इसकी जानकारी न मिले, तो यह वन विभाग की पेट्रोलिंग व्यवस्था में बड़ी चूक को दर्शाता है। कैमरा ट्रैप नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यदि उपकरण सक्रिय थे, तो बाघ की गतिविधि या संघर्ष से जुड़ी कोई रिकॉर्डिंग सामने क्यों नहीं आई।
मीडिया से दूरी, पारदर्शिता पर सवाल
इस पूरे मामले में वन विभाग की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय पत्रकारों का आरोप है कि अचानकमार प्रबंधन अक्सर ऐसी घटनाओं में मीडिया से दूरी बनाए रखता है। इस मामले में भी बाघ की मौत की जानकारी पहले अनौपचारिक तौर पर सामने आई, उसके बाद विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की। अब तक न तो मौत की सटीक समय-सीमा सार्वजनिक की गई है और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट या फील्ड जांच के निष्कर्ष साझा किए गए हैं, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है।
आपसी संघर्ष के दावे पर भी सवाल
वन विभाग ने बाघ की मौत को आपसी संघर्ष का परिणाम बताया है, लेकिन इस दावे के समर्थन में अभी तक कोई ठोस फॉरेंसिक साक्ष्य या वैज्ञानिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। यदि शव कई दिन पुराना था, तो इतनी जल्दी निष्कर्ष कैसे निकाल लिया गया? यह भी स्पष्ट नहीं है कि घटना स्थल का वैज्ञानिक परीक्षण हुआ या दूसरे बाघ की मूवमेंट ट्रैकिंग शुरू की गई, जो इस तरह के मामलों में जरूरी मानी जाती है।
फिलहाल बाघ की मौत को लेकर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मॉनिटरिंग से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि टाइगर रिज़र्व में वन्यजीव संरक्षण की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।




