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18 साल में वर्ल्ड गोल्ड, 23 की उम्र में डोपिंग प्रतिबंध; जानिए इस एथलीट की हैरान करने वाली कहानी

 भारतीय एथलेटिक्स की ‘ढिंग एक्सप्रेस’ हिमा दास आज सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि संघर्ष, सफलता और वापसी की मिसाल हैं। 9 जनवरी 2000 को असम में जन्मी हिमा दास इस साल अपना 26वां जन्मदिन मना रही हैं। जिस लड़की ने 18 साल की उम्र में दुनिया को चौंका दिया था, वह अब एक बार फिर ट्रैक पर वापसी के लिए तैयार है।

हिमा दास ने 2018 में फिनलैंड के टैम्पियर में हुई IAAF अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया था। 51.46 सेकंड में रेस पूरी कर वह किसी भी आयु वर्ग में वर्ल्ड चैंपियनशिप का गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बनीं। इसी के साथ उन्हें ‘ढिंग एक्सप्रेस’ का नाम मिला और भारत में एथलेटिक्स को नई पहचान मिली।

18 की उम्र में चमकी

उस वक्त 18 साल की हिमा पहले से ही फेवरेट मानी जा रही थीं और उन्होंने उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए स्वर्ण पदक जीता। खास बात यह रही कि यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय भी नहीं था। 2018 एशियाई खेलों में उन्होंने 400 मीटर में 50.79 सेकंड का अपना बेस्ट टाइम दर्ज किया और रजत पदक जीता। उसी टूर्नामेंट में उन्होंने मिश्रित 4×400 मीटर और महिलाओं की 4×400 मीटर रिले में स्वर्ण पदक भी अपने नाम किए।

दो महीनों में सात स्वर्ण

2019 में हिमा दास का स्वर्णिम दौर चरम पर था। यूरोपीय सर्किट टूर के दौरान उन्होंने महज दो महीनों में सात स्वर्ण पदक जीते। जिसमें पांच 200 मीटर और दो 400 मीटर स्पर्धाओं में स्वर्ण जीता। यह उपलब्धि उन्हें भारत की सबसे बड़ी एथलेटिक स्टार्स में शामिल करने के लिए काफी थी।

आरोप, निलंबन और कठिन दौर

हालांकि, करियर के शिखर पर पहुंचने के बाद हिमा को बड़ा झटका लगा। 2023 में नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) ने उन पर प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन का आरोप लगाया, जिसके चलते उन्हें 16 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया। यह निलंबन नवंबर 2024 में खत्म हुआ। यह दौर उनके करियर का सबसे कठिन समय रहा। हालांकि, उन्होंने अब वापसी कर ली है।

वापसी की तैयारी में जुटी हिमा दास

जनवरी 2025 में हिमा दास ने महाकुंभ में गंगा स्नान किया, जिसे उन्होंने नए सत्र की शुरुआत और मानसिक मजबूती का प्रतीक बताया। अब निलंबन खत्म होने के बाद वह एक बार फिर ट्रैक पर लौटने की तैयारी में जुट गई हैं। 26 साल की उम्र में हिमा दास की कहानी सिर्फ पदकों की नहीं, बल्कि गिरकर उठने की कहानी है। ‘ढिंग एक्सप्रेस’ की वापसी भारतीय खेल प्रेमियों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है।

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